विंध्यवासिनी देवी मंदिर के गर्भगृह के मुख्य द्वार पर 51 किलो चांदी का नक्काशीदार पत्तर चढ़ेगा। लकड़ी का फ्रेम तैयार हो गया है। चांदी की नक्काशी का आर्डर वाराणसी के कारीगर को दिया गया है। लखनऊ के एक भक्त ने माता-पिता की शादी की 50वीं सालगिरह पर मां के चरणों में यह भेंट देने का संकल्प लिया है।
तीर्थ पुरोहित पंकज द्विवेदी ने बताया कि एक भक्त ने माता-पिता के सुखी वैवाहिक जीवन के 50 वसंत पूरे होने के उपलक्ष्य में मां के चरणों में 51 किलोग्राम का चांदी का दरवाजा भेंट करने का संकल्प लिया है। इसके लिए मां के मंदिर के गर्भगृह के दरवाजे पर सागौन की लकड़ी का आधार तैयार किया गया है।
चांदी के पत्तर की नक्काशी का आर्डर वाराणसी के कारीगर को दिया गया है। इसमें चार जोगनियां, मां की सवारी सिंह, ऋद्धि सिद्धि, गणेश जी और मोर बने हैं। इसे फूल-पत्तियों से सजाया गया है।
चांदी के दरवाजे को फरवरी के दूसरे सप्ताह में लगाने की योजना थी लेकिन चुनाव के कारण सोना-चांदी ले जाने, ले आने में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए इसे अब मतदान के बाद लगाने का निश्चय किया गया है। मां के मंदिर के मुख्य द्वार से दर्शन पूजन करने वालों को गर्भगृह में पहुंचने से पूर्व इस गेट से गुजरेंगे।