प्रख्यात साहित्यकार नरेंद्र कोहली ने कहा कि पद्म पुरस्कार देने में पक्षपात होता है। पक्षपात कितनी सीमा तक हो रहा है, ये देखने वाली बात है। सरकार जिसे नहीं जानेगी, उसे भला क्यों पुरस्कार देगी। शरद पवार को पद्म भूषण देने पर यही सवाल तो उठ रहे हैं।
हर व्यक्ति इस पर सवाल उठा रहा है और ये सही भी है। सरकार का यह फैसला गलत है। अगर मुझे अधिकार होता तो मैं ऐसा कतई नहीं होने देता। हो सकता है इसके पीछे कांग्रेस से दूर रखने की राजनीतिक चाल हो लेकिन जो भी हो, ये गलत है।
सरकार ने हाल में ही पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है। इनमें नरेंद्र कोहली भी शामिल हैं। बीते दो दिन से वे शहर में हैं। शनिवार को रविंद्रपुरी स्थित ‘संत कृपा’ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कोहली ने कहा कि लोग तो मुझे भी कह रहे कि विराट कोहली और नरेंद्र कोहली को एक साथ पद्मश्री मिल रहा है, जरूर कोई षड्यंत्र का हिस्सा है।
उन्हें ये कौन बताए कि अगर मुझे षड्यंत्र करना होता तो मैं उस वक्त न कर लेता जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, क्योंकि वे भी तो ‘कोहली’ ही थे। उन्होंने कहा कि आज हिंदी की हालत खराब है। युवाओं की साहित्य के प्रति रुचि इसलिए नहीं रह गई क्योंकि उनकी भाषा ही बदल दी गई है।
माता-पिता बच्चों को कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। इसके पीछे सरकार का दोष है। पश्चिमी देशों की नकल करते हुए जवाहर लाल नेहरू के जमाने से ही उच्च शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी ही है। साठ साल से हम इसका खामियाजा भुगत रहे हैं।
अब हमें शिक्षा नीति में बदलाव लाना होगा। आर्यभट्ट, चाणक्य जैसे विद्वानों को पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा। प्रकाशकों के शोषण के सवाल पर उन्होंने कहा कि लेखकों को एक कोऑपरेटिव सोसाइटी का गठन करना चाहिए। हालांकि लेखकों में जितना ईर्ष्या-द्वेष होता है, उतना किसी में नहीं। लेखकों को अपना स्वार्थ छोड़ना होगा।