यूपी के गाजीपुर जिले की धरती शहीदी धरती की पहचान रखती है। पहली बार जिले के किसी व्यक्ति के तार आतंकवादियों से जुड़े होने की बात सामने आई है। गांव के लोग उसे आतंकी कहने लगे हैं। कारगिल युद्ध में जिस जिले के सात सपूतों ने अपने प्राणों को देश के लिए न्यौछावर करते हुए विजय का तिरंगा लहराया और देश के साथ ही जिले का नाम रौशन किया वहीं शेख अली अकबर ने आतंकवादियों से तार जोड़कर जिले का नाम आतंक से जोड़ दिया है।
जमानिया तहसील के कसेरा पोखरा निवासी शेख अली अकबर का संबंध आतंकवादी संगठन से होने और परिवार के सदस्यों एवं करीबियों से अलग-अलग पूछताछ किए जाने से गांव के लोग दहशत में है। अकबर की गिरफ्तारी के बाद उससे मेलजोल रखने वाले तमाम लोग भयवश गांव छोड़कर इधर-उधर रहने लगे हैं। चर्चा है कि अकबर पैसे के लालच और गलत सोहबत में फंस कर आतंकवादी संगठन से जुड़ गया। सच सामने आने के बाद लोग अब उसका नाम लेने से कतरा रहे हैं।
एटीएस के मुताबिक अकबर काफी दिनों से आतंकवादियों को हथियार सप्लाई करता था। ग्रामीणों को भय है कि पुलिस कब किस व्यक्ति से पूछताछ करने लगेगी। बता दें कि सोमवार को लखनऊ से पकड़ा गया गाजीपुर निवासी शेख अली अकबर न सिर्फ आतंकवादियों की मदद कर रहा था बल्कि खुद भी आतंकी बनने की राह पर था। एटीएस ने अकबर के मोबाइल से जो डाटा रिकवर किया है, उसके मुताबिक वह पाकिस्तान और कश्मीर में बैठे आईएसआई एजेंट समेत 20 आतंकवादियों के संपर्क में था।
एटीएस अकबर के एक और साथी महबूब से भी पूछताछ कर रही है। उधर, कोर्ट ने अकबर को 10 दिन की रिमांड पर एटीएस को सौंप दिया है। एटीएस उससे कश्मीर से लेकर पाकिस्तान और यूपी में उसके साथियों के बारे में पड़ताल करेगी। यूपी एटीएस ने अकबर के एक और साथी महबूब को भी पूछताछ के लिए बुलाया। उस पर शक है कि अकबर की सारी गतिविधियां उसे मालूम थीं।
एटीएस इस बात की पड़ताल कर रही है कि कहीं वह अकबर को सहयोग तो नहीं कर रहा था? आईजी एटीएस असीम अरुण ने बताया कि अकबर ने सितंबर में फेसबुक पर जेहाद नाम से सर्च किया और कुछ नंबर वहां से हासिल किए। तब से वह एक के बाद एक व्हाट्स एप ग्रुप से जुड़ता चला गया। अकबर के मोबाइल में 9 ऐसे व्हाट्स एप ग्रुप मिले हैं जिसमें देश विरोधी गतिविधियां चल रही थी।
जिन व्हाट्सएप ग्रुप में अकबर जुड़ा था, उसमें हिजबुल हमारी शान है, फ्रीडम फाइटर्स, हिज्ब मीडिया, जमात उद दावा कश्मीर, कश्मी की आजादी और मूसा-मूसा नाम के ग्रुप प्रमुख हैं। इन्हीं ग्रुप मं से एक में कश्मीर के बांदीपुरा में पकड़े गए आतंकी भी जुड़े थे, जिसने इससे पिस्टल की डिमांड रखी और इसके लिए दो बार में 40 हजार रुपये अकबर के रिश्तेदार के बैंक खाते में जमा कराए गए।
एक बार 10 हजार रुपये और दूसरी बार में 30 हजार रुपये खाते में डाले गए। यह पिस्टल जम्मू में डिलीवर होनी थी। बांदीपुरा में पकड़े गए आतंकी वहां से जम्मू आते और अकबर को गाजीपुर से जम्मू पहुंचना था।