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आजमगढ़ का यह गांव है बेहद खास, पंचायत भवन में प्रतिदिन लगती है प्राइमरी से स्नातक की कक्षा

Sun, 01 Dec 2019 09:30 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी मनोज गोंड, अमर उजाला, आजमगढ़
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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आजमगढ़ जिले में परिषदीय विद्यालयों में बतौर सहायक अध्यापक तैनात दो शिक्षकों की अनोखी पहल आज गांव के अन्य बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहा है। दोनों सहायक अध्यापक गांव के आधा दर्जन अन्य पढ़े लिखे युवाओं के साथ गांव में ही नि:शुल्क कोचिंग चला कर बच्चों को शिक्षित कर रहे है। प्राइमरी से लेकर स्नातक तक की नि:शुल्क शिक्षा पंचायत भवन में बच्चों को दी जा रही है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस नि:शुल्क कोचिंग के पढ़े दो युवक हाल में घोषित सिपाही भर्ती परीक्षा में भी उत्तीर्ण हुए है। 

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लालगंज तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम सभा रसूलपुर गोसाई बाजार निवासी अविनाश गौतम व सुनील देवराज परिषदीय विद्यालयों में बतौर सहायक अध्यापक तैनात है। 2016 में तैनाती के बाद से ही दोनों युवाओं ने गांव के बच्चों को शिक्षा में सहयोग करने का निर्णय लिया। गांव के आधा दर्जन अन्य युवा भी इनके मुहिम में जुटे और फिर गांव के ही पंचायत भवन में नि:शुल्क कोचिंग की शुरूआत की गई। इस कोचिंग में प्राइमरी से लेकर स्नातक तक के बच्चों को नि:शुल्क कोचिंग दी जा रही है।

ग्रामीणों के सहयोग व अपने वेतन से धनराशि लगा कर युवाओं की यह टीम गांव के बच्चों के बीच शिक्षा का अलग जगाए हुए है। शाम चार बजे से गांव के पंचायत भवन में कोचिंग की शुरूआत होती है और छह बजे तक कक्षाएं संचालित होती है। दो सहायक अध्यापकों के साथ ही उनके आधा दर्जन अन्य साथी सभी बच्चों को उनकी कक्षा के अनुरूप तैयारियां करा रहे है। अब तो इस नि:शुल्क कोचिंग में प्रतियोगी परीक्षा की भी तैयारी करायी जा रही है। हाल ही में इस पुलिस भती के जारी हुए परीक्षा परिणामों में इस कोचिंग के पढ़े दो युवक सिपाही पद पर चयनित हुए है। 
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ग्रामीणों के सहयोग से हो रहा संचालन

आजमगढ़। सहायक अध्यापक अविनाश गौतम ने बताया कि 2016 में परिषदीय विद्यालय में नियुक्ति के बाद उनके मन में गांव के बच्चों को शिक्षित करने का विचार आया। गांव के लोगों और साथी सुनील के साथ मिल कर बच्चों को पढ़ाने का निर्णय हुआ और फिर गांव वालों के सहयोग से यह नि:शुल्क कोचिंग संचालित होने लगी। आज भी हम अपने पास से पैसा लगा कर चाक-डस्टर आदि का इंतजाम करते है। जरूरत पड़ने पर गांव के लोग भी अपने स्तर से कोचिंग संचालन के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराते रहते है। हमारा उद्देश्य सिर्फ गांव के बच्चों को शिक्षित करना और शिक्षा का एक बेहतर माहौल बनाना है। 

पढ़ाई के साथ संचालित होती है अन्य एक्टीविटी

आजमगढ़। युवाओं की यह टीम गांव के बच्चों को पढ़ाने के साथ ही अन्य एक्टीविटी में भी बच्चों को आगे बढ़ रहा है। अक्सर ही गांव में साफ-सफाई अभियान चलाया जाता है। जिसमें बच्चें व ग्रामीण एक जुट होकर पूरे गांव की सफाई भी करते है। इतना ही नहीं बच्चों के बीच प्रतियोगिताएं आयोजित कर उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार किया जा रहा है। टीम का प्रयास है कि बच्चों को पढ़ाई के साथ ही कुछ व्यवसायिक शिक्षा भी दी जाये, जिसके प्रयास में भी टीम लगी हुई है। 

स्कूल न जाने वाले बच्चें भी पढ़ते है यहां

आजमगढ़। रसूलपुर गोसाईबाजार गांव की सीमा में काफी संख्या में नट बिरादरी के लोग झोपड़ी आदि डाल कर निवास करते है। इस बिरादरी के बच्चे किसी स्कूल में पढ़ते नहीं थी। गांव के युवाओं की टीम के प्रयास से अब अस्थायी रूप से निवास कर रहे नट बिरादरी के बच्चे भी इस नि:शुक्ल कोचिंग में शाम चार से छह बजे तक पढ़ाई कर रहे है। 
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