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मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद उसके गांव में पसरा सन्नाटा, ग्रामीणों ने ये कहा

Mon, 09 Jul 2018 06:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जौनपुर
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मुन्ना बजरंगी का घर - फोटो : अमर उजाला
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बागपत जेल में बदमाशों की गोली का शिकार हुआ कुख्यात माफिया डॉन प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी यूपी के जौनपुर जिले का निवासी था। सुरेरी थाना क्षेत्र के पूरेदयाल कशेरू गांव निवासी मुन्ना बजरंगी की हत्या की सूचना परिवार व गांव वालों को टीवी चैनल से मिली।
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सूचना मिलते ही पूरे गांव में सन्नाटा छा गया। बुजुर्ग और महिलाएं अपने घरों में कैद हो गए और मुन्ना के परिवार के अधिकांश लोग बागपत जाने की तैयारी में जुट गए।  गांव की महिला रिटायर्ड प्रधानाध्यापक उर्मिला सिंह का कहना है कि मुन्ना लोगों के लिए भले ही अपराधी था लेकिन गांव में वह सीधा सादा ही दिखता था। गांव के हर लोगों की भलाई के बारे मे ही सोचता था। लोगों के झगड़े में भी कभी हस्तक्षेप नहीं किया। अगर झगड़े की बात उस तक पहुंचती तो वह उसे सुलह समझौते के आधार पर ही निबटाने का प्रयास करता था।  

पूरेदयाल ग्राम पंचायत के राजस्व गांव सोरहां गांव निवासी श्रीराम यादव का कहना है कि मुन्ना बचपन के दिनों में पहलवानी करते थे। गांव में पांचवीं तक की पढ़ाई किया लेकिन किसी के साथ कोई झगड़ा उसका नहीं हुआ। जरायम की दुनिया में कैसे वह पहुंच गया और बेताज बादशाह कैसे बन गया था लोगों को भरोसा ही नहीं होता।
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रिश्ते में भाई लगने वाले बुजुर्ग मंगला सिंह व मुन्ना सिंह ने वो हम लोगो के लिए मसीहा थे। उनकी हत्या में प्रशासन और कुछ नेताओं का हाथ होने का अंदेशा है। वह विधायक बनना चाहते थे, लेकिन नहीं बन सके।

मुन्ना का भतीजा सूरज का कहना था कि घर के लोग सूचना मिलते ही बागपत के लिए निकल गए। गांव के लोग आ जा रहे हैं।  हत्या के बाद परिवार को भी भय है। इसलिए सतर्कता बरत रहे हैं।  
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मुन्ना की पहली पत्नी ने कर ली दूसरी शादी

मुन्ना बजरंगी के घर के बाहर बैठे लोग - फोटो : अमर उजाला
 मुन्ना बजरंगी की शादी किशोरावस्था में ही हो गई थी। बजरंगी 1984 में कालीन व्यवसायी को गोली मारकर फरार हो गया और लंबे समय तक फरारी काटता रहा। भोपाल गैस कांड में मुन्ना के मौत की अफवाह फैलने के बाद उसकी पत्नी शकुंतला सिंह ने अपने नए जीवन साथी के रूप में देवर राजेश को चुन लिया।

देवर के साथ शादी के बाद शकुंतला ने बेटी को जन्म दिया फिर कुछ दिनों बाद शकुंतला की मौत हो गई।  पारसनाथ सिंह के चार पुत्र थे जिसमें प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना सबसे बड़ा था। दूसरे राजेश सिंह मुंबई दूर संचार में कार्यरत हैं। तीसरे राकेश सिंह की मौत हो चुकी है। चौथे और सबसे छोटे भाई भुआल सिंह गुड्डू घर पर रहता है।  

तीन साल पहले आखिरी बार घर आया था मुन्ना बजरंगी

मुन्ना बजरंगी
मुन्ना बजरंगी मां की तेरहवीं में शामिल होने के लिए तीन साल पहले पेरोल पर छूटकर आखिरी बार घर आया था।  मुन्ना बजरंगी की मां लीलावती सिंह का निधन  आठ मई 2015 को हो गया था। उस वक्त बजरंगी सुल्तानपुर जिला कारागार में बंद था।

उसे मां के शुधक और तेरहवीं में शामिल होने के लिए 16 मई से 20 बीस मई तक पेरोल मिला था। मां की मौत के बाद शुधक और तेरहवीं में शामिल होने के लिए उसने 20  हजार लोगों को निमंत्रण बाटा था।

तेरहवीं के दिन 20 मई को पूर्वांचल के नामी शूटर, सूबे के कई रसूखदार, लोगों सहित तकरीबन दस हजार लोगों की भीड़ जुटी थी। प्रशासन ने बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात किया था।
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36 साल से दहशत का पर्याय बना था बजरंगी

- फोटो : अमर उजाला
बागपत जिला जेल में बदमाशों की गोली का शिकार हुआ अंतरराज्यीय गैंग नंबर 233 का सरगना प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी बीते 36 साल से जरायम जगत का कुख्यात नाम था। हत्या और रंगदारी वसूलने के लिए कुख्यात बजरंगी की हनक पूर्वांचल के साथ ही प्रदेश के अन्य जिलों और नई दिल्ली के अलावा मुंबई के अंडरवर्ल्ड जगत में भी थी।

अत्याधुनिक असलहों के सहारे बेखौफ तरीके से वारदात को अंजाम देने वाले बजरंगी की हत्या से पूर्वांचल ही नहीं प्रदेश में आतंक का एक अध्याय समाप्त होे गया। मुन्ना बजरंगी के खिलाफ वर्ष 1982 में सुरेरी थाना में मारपीट और बलवा के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी वर्ष उसके खिलाफ सुरेरी थाना में ही हत्या और लूट का मुकदमा दर्ज किया गया।

इसके बाद वर्ष 1984 में जौनपुर के रामपुर थाना में और 1985 में वाराणसी के कैंट थाना में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद बजरंगी ने मुड़ कर पीछे नहीं देखा और जरायम जगत का कुख्यात नाम बन गया।

जौनपुर, वाराणसी, गाजीपुर सहित प्रदेश के अन्य जिलों और नई दिल्ली में मौजूदा समय में बजरंगी के खिलाफ हत्या, रंगदारी सहित अन्य आरोपों में 28 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से कुछ मुकदमों से निचली अदालत से बजरंगी बरी भी हो गया था।
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