महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में छात्रसंघ चुनाव को लेकर माहौल तनावपूर्ण है। परिसर जहां छावनी में तब्दील है, वहीं बुधवार को भी छात्र प्रशासनिक भवन के सामने धरने पर बैठे रहे। प्रशासन ने छात्रों को मनाने का काफी प्रयास किया, लेकिन एनएसयूआई, एबीवीपी और सछास के छात्रनेता चुनाव की मांग पर अड़े हुए हैं।
काशी विद्यापीठ के सभी प्रवेश द्वार बुधवार को बंद कर दिए गए। बिना अनुमति प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया। बावजूद छात्र संगठनों के नेता और गंगापुर कैंपस के छात्र नेता परिसर में धरने पर बैठ गए। छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय ने जिला प्रशासन के इशारे पर छात्रसंघ चुनाव स्थगित कर दिया है। जब तक चुनाव की तिथि घोषित नहीं होती है तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कहा कि यदि चुनाव नहीं हुआ तो छात्र आंदोलन को व्यापक करने के लिए बाध्य होंगे। दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन आंदोलनरत छात्रों को समझाने में जुटा हुआ है। शाम पांच बजे चीफ प्राक्टर प्रो. निरंजन सहाय छात्रों से बातचीत करने पहुंचे, लेकिन बात नहीं बनी।
चुनाव अधिकारी प्रो. आरपी सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन की स्वीकृति पर ही अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन कमिश्नरेट पुलिस ने छात्रसंघ चुनाव के लिए पर्याप्त पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने में असमर्थता जाहिर कर दी। इसके चलते ही पूर्व घोषित तिथि पर छात्रसंघ चुनाव कराना संभव नहीं है।
हाईकोर्ट पहुंचा छात्रसंघ चुनाव का मामला
वाराणसी। विद्यापीठ छात्रसंघ चुनाव का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। छात्रों ने प्रदेश सरकार, कुलपति, कुलसचिव, चुनाव अधिकारी, मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को पक्षकार बनाते हुए रिट याचिका दायर की है। छात्रों ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि चुनाव के लिए नामांकन और वैध प्रत्याशियों की सूची जारी करने के बाद अचानक 20 दिसंबर को चुनाव स्थगित कर दिया गया। छात्रों ने पूर्व निर्धारित 24 दिसंबर को चुनाव कराने की मांग की है। याचिका दायर करने वाले शशि प्रकाश चंदन ने बताया कि रिट याचिका पर 23 दिसंबर को सुनवाई है। ब्यूरो