भारतीय सेना में धर्म शिक्षक की परीक्षा से शास्त्री डिग्रीधारियों को बाहर किए जाने मामला अब तूल पकड़ने लगा है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की आपत्ति के बाद अब देश भर के 17 विश्वविद्यालय रक्षामंत्री को पत्र लिखेंगे। समस्या के स्थायी समाधान और शास्त्री डिग्रीधारियों के भविष्य को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि इस संबंध में देश के सभी संस्कृत विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से संपर्क किया जा रहा है ताकि वह रक्षामंत्री को पत्र लिखें। उन्होंने बताया कि इसे मुद्दे पर गत दिनों नई दिल्ली में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर उनसे मिलकर स्थायी समाधान कराने का अनुरोध किया था। उन्होंने रक्षामंत्री को शास्त्री की डिग्री स्नातक के समकक्ष व आचार्य की डिग्री स्नातकोत्तर के समकक्ष होने के संबंध में यूजीसी की ओर जारी समकक्षता का आदेश भी सौंपा था।
उन्होंने बताया कि रक्षामंत्री ने इसके स्थायी समाधान के लिए आश्वासन दिया है। ऐसे में छात्रों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। देशभर के संस्कृत विद्वानों ने सेना के इस कदम पर चिंता जाहिर की है। काशी विद्वत परिषद, श्री काशी विश्वनाथ न्यास, श्री काशी विद्वत कर्मकांड परिषद, अखाड़ा परिषद, अखिल भारतीय संत समिति ने चिंता जताई है। योगगुरु बाबा रामदेव ने भी ट्वीट कर कहा है कि संस्कृत दुनिया की सर्वाधिक प्राचीन व वैज्ञानिक भाषा है। भारत का पुरातन ज्ञान विज्ञान संस्कृत में ही है। देश में संस्कृत को समुचित सम्मान मिलना ही चाहिए। आज विदेशों में भी संस्कृत की पढ़ाई हो रही है।