Varanasi News: वाराणसी शहर के वरिष्ठ नाट्यकर्मी मोतीलाल गुप्ता का निधन हो गया। इसकी जानकारी होते ही रंगकर्मियों और साहित्यकारों ने श्रद्धांजलि दी। मोतीलाल गुप्ता बिहार से 16 साल की उम्र में काशी आ गए थे। उन्होंने 37 नाटकों का मंचन करवा कर रिकॉर्ड बनाया।
वाराणसी शहर के वरिष्ठ रंगकर्मी, नाट्यकार व नाट्य निर्देशक और गोकुल आर्ट के संस्थापक सदस्य मोतीलाल गुप्ता का बृहस्पतिवार देर रात निधन हो गया। वह 63 साल के थे। वह एक सप्ताह से बीमारथे। बीएचयू में इलाज के दौरान हृदयाघात से उनकी मृत्यु हो गई। अंतिम संस्कार शुक्रवार सुबह मणिकर्णिका घाट पर हुआ। मुखाग्नि भतीजे उत्तम ने दी।
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मोतीलाल गुप्ता ने अपनी विरासत के रूप में प्रेरणा कला मंच के 11 कलाकारों के साथ नाट्य अनुष्ठान 2009 में किया। शनागरी नाटक मंडली में 37 नाटकों का 34 घंटे नॉन स्टॉप मंचन कर गिनीज बुक का रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया। उन्होंने एक नई विधा एवरग्रीन शैली का आविष्कार किया था।
मूलरूप से बिहार के आरा जिले के मोतीलाल आठ भाइयों में पांचवें नंबर पर थे। तीन भाइयों का पहले ही निधन हो चुका है। मोतीलाल 16 साल की उम्र में ही काशी आ गए थे। हरिश्चंद्र डिग्री कॉलेज से एमकॉम करने के बाद उनका रुझान नाट्य क्षेत्र में बढ़ा और गोकुल आर्ट्स से जुड़ गए। अधिशासी रहते 27 वर्षों तक अखिल भारतीय हिंदी लघु नाटक प्रतियोगिता करवाई। मुंशी प्रेमचंद की दर्जनों कहानियों को नाट्य रूपांतरित किया।
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गोकुल आर्ट्स के अध्यक्ष डॉ. एसएस गांगुली ने बताया कि रंगमंच उनका जीवन था। भोजपुरी फिल्मों का निर्देशन भी किया। प्रेरणा कला मंच के फादर आनंद, राजेश श्रीवास्तव, रणजीत यादव, अजय रोशन, अजय थापा, विवेक गुप्ता, नवीन चंद्रा, संजय वर्मा, असलम शेख, राज शेखर गांगुली, हरिश्चंद्र पाल, भोला सिंह राठौड़ आदि रंगकर्मियों और साहित्यकारों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।