शिल्पायन के विद्यार्थियों ने भजन-गायन से भक्ति रस को और गहरा किया। एनएसडी के उमेश भाटिया ने संत रविदास के जीवन पर आधारित नाटक उनके सामाजिक दर्शन, समानता और मानवता के संदेश को गहराई से जोड़ा।
दोपहर बाद डॉ. मंजरी पांडेय के समन्वयन में कवि सम्मेलन हुआ। डॉ. नसीमा निशा, डॉ. धर्मप्रकाश मिश्र, धर्मेंद्र गुप्त साहिल, डॉ. महेंद्र अलंकारी एवं डॉ. रचना शर्मा ने ओजपूर्ण और भावनात्मक रचनाओं ने संत रविदास के विचारों को आधुनिक संदर्भों से जोड़ा। शाम के सत्र में लोक कलाकारों के धोबिया नृत्य की मोहक प्रस्तुति हुई। नवोदित कलाकार पं. अवंतिका महाराज ने एकल तबला वादन से संगीत प्रेमियों को अपने वश में कर लिया।
पं. मता प्रसाद मिश्रा एवं पं. रविशंकर मिश्रा ने बनारस घराने के कथक से दर्शकों को ताल, लय और भाव की त्रिवेणी में डुबोया। अंतिम प्रस्तुति डॉ. सोमा घोष की रही। उन्होंने संत रविदास को सुरों से नमन व वंदन किया। राग हंसध्वनि में खुद के तराने और संत रविदास के कुछ दोहों को अपने सुरों में पिरोकर सभी को मुग्ध कर दिया। सुबह से रात तक चले समारोह में राज्यमंत्री दयाशंकर मिश्रा दयालु भी संगीत रस का आनंद लिये। उनका सम्मान हुआ।
आज अनूप जलोटा के भजनों की अमृतवर्षा
संत रविदास संगीत समारोह के अंतिम दिन शनिवार को सुबह आठ से रात 10 बजे तक भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा, सरोद वादक अंशुमान महाराज, पंड़ित गणेश प्रसाद मिश्र कलाकारों के अलावा लोकनृत्य, लोक गायन व कवि सम्मेलन होगा।