ऑपरेशन सिंदूर के बाद पता चली खासियत : वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि सिंदूर सदियों से भारतीय परंपरा में महिलाओं के लिए गर्व का प्रतीक रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद लोगों को इसकी खासियत पता चली है। यह पौधा बंजर जमीन पर भी उग जाता है और ज्यादा पानी और खाद की जरूरत नहीं होती है। इसके बीज, पत्ते, फल और छाल को कई बीमारियों में इस्तेमाल किया जाता है।
स्किन इन्फेक्शन के लिए कारगर दवाई : बीएचयू के आयुर्वेद संकाय के प्रोफेसर बी राम ने बताया सिंदूर के पौधे, पत्ती और बीज से कई बीमारियों का इलाज किया जाता है। स्किन इन्फेक्शन में ये काफी कारगर है। कोढ़, झाइयां, फुंसियां, खुजली, दाद से पीड़ित मरीजों को इससे फायदा मिलता है। इसका तेल पुराने घाव को साफ करने के काम आता है।
सिंदूर के बीज, पत्ते या छाल का इस्तेमाल कब्ज, गैस, पेट के कीड़े, अल्सर, दस्त और पेट से संबंधित अन्य बीमारियों के लिए भी किया जाता है। इसके साथ ही जुकाम, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों और गले की बीमारियों में भी इसके पत्तों और फूलों का रस या अर्क फायदेमंद होता है। वहीं टायफाॅयड और दिमागी बुखार के लिए इसकी छाल का इस्तेमाल किया जाता है। इसके पत्ते और फूलों के अर्क में दर्द निवारक गुण भी होते हैं।
एंटीबायोटिक की तरह काम करता है सिंदूर
वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि सिंदूर का पेड़ 10 से 15 फीट ऊंचा होता है। इसकी गोलाई तीन से चार फीट से ज्यादा नहीं होती है। सिंदूर के पौधे का उपयोग एंटीबायोटिक के रूप में भी किया जाता है। आयुर्वेद की रक्त शोधन दवाइयों में इस पेड़ के तने की छाल का उपयोग किया जाता है। चोट लगने पर भी इसके तने की छाल को घिसकर लेप लगाया जाता है। यह पौधा भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाता है।
वन विभाग भी इस बार सिंदूर के पौधे लगाएगा। सिंदूर के पौधे लगाने के साथ ही पौधरोपण की शुरुआत होगी। सिंदूर के पौधों की मांग बढ़ी है। - स्वाति श्रीवास्वतव, प्रभागीय वनाधिकारी वाराणसी।