वाराणसी के भदैनी स्थित जन्मस्थली पर वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की 187वीं जयंती मनाई गई। भव्य शोभायात्रा में वीरांगना की झांकी भी निकाली गई। बाल रूप में उनकी सहेलियों में झलकारी बाई और सैनिक टुकड़ी को देखने के लिए लोग छतों-बारजों से टकटकी लगाए रहे। महारानी लक्ष्मीबाई जन्मस्थली सेवा न्यास की ओर से गोयनका संस्कृत महाविद्यालय में संगोष्ठी का आयोजन हुआ।
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इस मौके पर जन्मस्थली पर वीरांगना अमर गाथा को याद किया किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सुनीता हेल्देकर ने किया। कहा कि आज महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान की वजह से हमारा देश आजादी की सांस ले रहा है। अध्यक्षता करते हुए रमा दुबे ने कहा कि खूब लड़ी मदार्नी वो तो झांसी वाली रानी थी लेकिन वह काशी की बेटी थी और हमारा फर्ज बनता है कि हम अपनी बेटी को उसकी वीरता के लिए याद करें।
राजेंद्र प्रताप पांडेय ने कहा कि देश की प्रथम महिला वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई ने स्वतंत्रता की लड़ाई में अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए। रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी के भदैनी में हुआ था। उन्हें यहां पर मणिकर्णिका नाम से बुलाया जाता था।