वैदिक विज्ञान केंद्र में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में विचार व्यक्त करते वक्त । स्रोत बीएचयू
बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र में चल रही अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन वेद पर वक्ताओं ने चर्चा की। मुख्य अतिथि जवाहर लाल नेहरू विवि के प्रो.रामनाथ झा ने कहा कि वेद ही विज्ञान है, दर्शन शब्द ऋषियों से आया है। इसकी महत्ता को बनाए रखने की जरूरत है। वैदिक विज्ञान के विविध स्वरूप विषय पर प्रो. रामनाथ ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में प्रत्यक्ष ज्ञान की बात की जाती है जबकि पश्चिमी ज्ञान परम्परा के अनुसार तार्किक विश्लेषण के माध्यम शोध कार्य किया जाता है।
क्वांटम भौतिकी के अनुसार सब कुछ एक दूसरे से जुड़ा हुआ है। बीएचयू वेद विभाग के प्रो.उपेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि यज्ञ विज्ञान में संपूर्ण सृष्टि समाहित है। यज्ञ हमारे जीवन का मूल आधार है और यज्ञों का मूल आधार अग्निहोत्र है। संपूर्ण ब्रह्माण्ड के संरक्षण के लिए यज्ञ विज्ञान पर शोध की जरूरत है। संस्कृत विवि के प्रो. महेंद्र पांडेय ने कहा कि भारतीय संस्कृति क्या है, सभ्यता क्या है इसको जानने के लिए यज्ञ को समझना जरूरी है। बीएचयू के प्रो. हरीश्वर दीक्षित ने कहा कि आज जब हम वैश्विक संकट के दौर से गुजर रहे हैं। सृष्टि के विकास के लिए यज्ञ विज्ञान के क्षेत्र में शोध जरूरी है। कार्यक्रम में राष्ट्रीय संस्कृत विवि नई दिल्ली से प्रो. रामराज उपाध्याय, बीएचयू से प्रो. आशीष वाजपेयी, डॉ. विवेक पाठक, प्रो. सुजाता अभिजात मौजूद रहीं।