वरुणा कॉरिडोर का निरीक्षण करने पहुंचे मुख्य सचिव आलोक रंजन।
वाराणसी की पहचान से जुड़ी वरुणा और असि नदी के अस्तित्व की रक्षा के लिए एक बड़ी पहल हुई है। ‘अमर उजाला’ की खबरों का संज्ञान लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार ने इन दोनों नदियों को अपने विजन डाक्यूमेंट में शामिल किया है। शुक्रवार को यहां आए प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारें मिलकर गंगा, वरुणा और असि नदी का उद्धार करेंगी। गंगा के प्रदूषण का मुख्य कारण नाला बन चुकीं वरुणा, असि नदियां हैं। गोमती की तर्ज पर वरुणा और असि नदी का विकास होगा।
राज्य और केंद्र की योजनाओं का हाल जानने आए मुख्य सचिव कमिश्नरी में पत्रकारों से मुखातिब थे। बताया कि नदियों के रिवर फ्रंट डेवलपमेंट का विजन डाक्यूमेंट बनाया जा रहा है। इसके तहत वरुणा और असि को विकसित किया जाएगा। नदियों के किनारे सीवर के पानी को रोकने के लिए पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इससे नदियों में जाने वाला प्रदूषण रुकेगा।
सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर का जिक्र करते हुए बताया कि वरुणा को हरा-भरा और स्वच्छ किया जाएगा। ज्ञानपुर कैनाल के जरिये वरुणा के जलस्तर को मेंटेन किया जाएगा।
शहर में गंदगी की समस्या पर मुख्य सचिव ने कहा कि कानपुर में भी वाराणसी जैसी समस्या रही लेकिन वहां दूसरी एजेंसी ने काम शुरू किया और स्थिति में सुधार हुआ। उसी तरह वाराणसी में भी एक सप्ताह के भीतर डोर टू डोर कूड़ा उठाने का काम शुरू करा दिया जाएगा। इसकी सारी प्रक्रियाएं हफ्ते भर में पूरी कर ली जाएंगी। बताया कि जिले को खुले में शौच मुक्त करने की योजना दिसंबर तक पूरी हो जाएगी। इसके तहत 3500 लोगों को चिह्नित किया गया है, जिनके घरों में शौचालय बनाए जाएंगे। इनके अलावा 205 स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय बनाए जाएंगे। घाटों पर भी शौचालय बनेंगे। इस पर लगी अदालत से रोक हट चुकी है।
मुख्य सचिव ने बताया कि रिंग रोड मामले की अड़चनों को दूर करने के लिए डीएम को निर्देश दिया गया है। अमृत योजना के तहत सभी घरों को पानी और सीवर पाइप लाइन से जोड़ा जाएगा। घाटों पर 24 घंटे साफ सफाई के लिए केंद्र सरकार से बात हुई है। स्ट्रीट लाइटों को एलईडी में बदलने का काम चल रहा है। ह्दय के तहत 80 करोड़ की योजना स्वीकृत है। इसमें 10 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। इसके तहत जो भी सड़कें बननी हैं, उनका निर्माण भूमिगत पाइप लाइन और अन्य संबंधित कार्यों के पूरा होने पर ही कराया जाएगा। ताकि एक बार सड़कें बन जाएं तो दुबारा खुदाई न करानी पड़े।