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वरुणा कॉरिडोर में दूसरी बार लगी आग शरारत या सुनियोजित साजिश ?

Wed, 15 Mar 2017 09:06 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट का विवादों से रहा है पुराना नाता - फोटो : अमर उजाला
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 कार्यवाहक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर में फिर भीषण आग धधकने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। भरी दोपहरी में सुरक्षा कर्मचारियों की मौजूदगी के बाद आग कैसे लगी, सुरक्षाकर्मियों के होते हुए हुड़दंगी वहां पहुंचे कैसे और कैसे आग लगा दी? सभी सामान एकत्र करके एक जगह रखे गए और ऐन होली वाले दिन ही आग लगी..?
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यह हुड़दंगियों की शरारत है या फिर सुनियोजित साजिश, यह जांच का विषय है। पहली बार बीते जनवरी माह में आग लगी थी। हालांकि वह आग तत्काल बुझा ली गई और कोई नुकसान नहीं हुआ। लेकिन इस बार तो आग में दो जेसीबी समेत लाखों का सामान जलकर राख हो गया।

वरुणा कॉरिडोर का विवादों से पुराना नाता रहा है। काम शुरू होने से पहले ही योजना को लेकर सवाल उठने लगे थे। डिजाइन को लेकर, निर्माण सामग्री, ग्रीन बेल्ट, रेलिंग, नाले आदि को लेकर कई बार तमाम सवाल उठे। काम का जिम्मा सिंचाई विभाग को दिया गया। निवर्तमान पीडब्ल्यूडी और सिंचाई राज्य मंत्री सुरेंद्र पटेल की इस प्रोजेक्ट पर खास निगहबानी रही।
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बावजूद इसके विवाद गहराते ही गए। काम की गुणवत्ता से लेकर अतिक्रमण तक के मसले पर हर बार सवाल उठते रहे और मंत्री से लेकर अफसर तक जांच समिति बिठाने और कार्रवाई करने के वादे करते रहे। अप्रैल 2016 में शुरू हुआ कॉरिडोर का काम इस साल इसी महीने में पूरा होना था लेकिन अब तक महज 40 से 50 फीसदी ही काम हो सका है। 

जिस तरह जेएनएनयूआरएम के तहत बगैर एसटीपी का निर्माण कराए सीवर पाइन लाइन डालने के लिए पूरे शहर को खोद डाला गया, उसी तरह बगैर वरुणा में गिरने वाले नालों को रोके यहां कॉरिडोर का काम शुरू करा दिया गया।

जब दबाव बढ़ा तो आननफानन में नदी के दोनों किनारे सीवर की पाइप लाइन डाली जाने लगी। वीडीए ने भी नदी के दोनों तरफ 50 मीटर ग्रीन बेल्ट घोषित कर निर्माण कराने से आम लोगों को तो रोक दिया, लेकिन रसूखदारों को खुली छूट दी गई।

इस दायरे में बगैर अनुमति के निर्माण कराने वालों को 762 लोगों को नोटिस पकड़ाया गया और नोटिस देने के महीनों बाद जब कार्रवाई की बारी आई तो हर बार टीम को विरोध के चलते लौटना पड़ा। 

भाजपा नेताओं ने घोटाले का लगाया आरोप

सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट का विवादों से रहा है पुराना नाता - फोटो : अमर उजाला
सिंचाई विभाग ने 201 करोड़ रुपये की योजना बनाई थी। डीएम बंगले से लेकर सराय मोहाना तक 10.3 किमी नदी का चैनलाइजेशन किया जाना है। पर्यटन के लिहाज से इसका विकास किया जा रहा है। कॉरिडोर के काम में अब तक 80 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।

बीच में विभाग ने 219 करोड़ रुपये का रिवाइज इस्टीमेट बनाया था। जिसे सरकार ने मंजूर नहीं किया था। इसी बीच विभाग ने खर्च नहीं करने के कारण 20 करोड़ रुपये भी सरकार को वापस कर दिए थे। 

भाजपा नेताओं ने घोटाले का लगाया आरोप 
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश त्रिवेदी आग लगने के बाद वरुणा कॉरिडोर पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रशासन की लापरवाही के चलते यह घटना हुई। आरोप लगाया कि बाढ़ के दौरान भी ढाई महीने तक काम न करके अधिकारियों ने घोटाला किया।

अब आग की आड़ में करोड़ों के घोटाले का अंदेशा है। उन्होंने इसकी जांच की मांग की। इस दौरान क्षेत्रीय संयोजक चाणक्य त्रिपाठी, चंद्रभूषण सिंह आदि शामिल रहे। 
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वरुणा कॉरिडोर : एक नजर में

सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट का विवादों से रहा है पुराना नाता - फोटो : अमर उजाला
2016 अप्रैल में शुरू हुआ योजना पर काम
2017 मार्च में तय थी काम पूरा होने की अवधि
201 करोड़ की योजना
80 से 90 करोड़ रुपये अब तक खर्च
10.3 किमी डीएम बंगले से सराय मोहाना तक होना है चैनलाइजेशन 
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