वाराणसी में गंगा तट पर आमेर के राजा मान सिंह द्वारा 1600 ईस्वी में बनवाया गया मान महल के सुंदरीकरण का काम कई महीने से अटका है। वजह है रास्ते में अतिक्रमण। इस वजह से निर्माण सामग्री मान महल तक नहीं पहुंच पा रही है। पुरातत्व विभाग ने कई बार अतिक्रमण की शिकायत की। प्रशासन को कई पत्र लिखे। तीन बार रिमांइडर भी भेजा मगर प्रशासन ने अभी तक अतिक्रमण नहीं हटाया।
मान महल में वर्चुअल म्यूजियम बनकर तैयार है। मगर अतिक्रमण की वजह से इसके प्रवेशद्वार का काम और सुंदरीकरण का काम नहीं हो पा रहा। मान महल की ओर आने वाले रास्ते पर अवैध दुकाने चल रही हैं। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए दिशा सूचक भी बनाए जाने हैं। मगर निर्माण सामग्री लाने में दिक्कत हो रही है। ऐसे में निर्माण अधूरा है।
अगर अतिक्रमण हट गया होता तो पिछले माह ही इस म्यूजियम का उद्घाटन हो गया होता। इस वर्चुअल म्यूजियम में काशी की कला, धर्म-संस्कृति को बताने के लिए प्रोजेक्टर लगाए गए हैं। पुरातत्व विभाग उप निदेशक डॉ. नीरज सिन्हा ने कहा कि अतिक्रमण की वजह से मान महल के वर्चुअल म्यूजियम का कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है। इसके लिए कई बार पत्र लिखकर रिमांइडर भेेजा गया, लेकिन आज तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया।
काशी के बारे में बताएगा वर्चुअल म्यूजियम
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वाराणसी जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने कहा कि मान महल के वर्चुअल म्यूजियम का काम पूरा होने में आ रही बाधाओं को दूर कराया जाएगा। अतिक्रमण को हटाने के लिए टीम गठित कर कार्रवाई होगी। राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद की ओर से मान महल में वेधशाला के नीचे बने भवन के हाल और तीन कमरों में यह संग्रहालय बनाया गया है। इसमें कुल 12 प्रोजेक्टर लगाए गए हैं।
इनमें से छह हाल में लगे हैं। भवन की दीवारों को इस तरह से तैयार किया गया है ताकि प्रोजेक्टर के माध्यम से उन पर काशी की धार्मिक, पौराणिक और सांस्कृतिक विरासत को दिखाया जा सके। म्यूजियम में काशी के घाट, मंदिर, गलियां, राम नगर की रामलीला, नाटी इमली का भरत मिलाप, तुलसी घाट की नाग नथैया, साड़ी बुनने की कला, काष्ठ कला और गंगा आरती को भी दर्शाया जाएगा। प्रवेश द्वार पर भगवान शंकर की प्रतिमा होगी, जहां घंटी बजाते ही भगवान पर पुष्पवर्षा होगी।
विधान परिषद की समिति के निर्देशों का भी पालन नहीं
आईपीडीएस के कार्यों की जांच करने के लिए बीते 26 नवंबर को विधान परिषद की जांच समिति आई थी। इस दौरान समिति ने गोदौलिया से चौक के बीच पैदल ही निरीक्षण करके बिजली ट्रांसफार्मरों के तारों को दुरुस्त करने की हिदायत पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को दी थी। 12 दिन बीतने के बाद भी समिति के निर्देशों का पालन नहीं हुआ है। तारों का जाल फैला हुआ है।
समिति के सदस्यों में शामिल एमलएसी शतरूद्र प्रकाश ने वहां की जनता को बुलाकर ट्रांसफार्मरों के बारे में पूछताछ की थी। बड़ादेव के पास लगे ट्रांसफार्मर के बारे में स्थानीय लोगों ने कहा कि अक्सर यहां स्पार्किंग होती है। कई बार ट्रांसफार्मर से तेल गिरता है। जालान के पास लगे ट्रांसफार्मरों में तारों का मकड़जाल है। उसे दुरुस्त कराने को कहा था।
सभी ट्रांसफार्मरों को दुरुस्त करने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया था। मगर कोई काम नहीं हुआ। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के एमडी गोविंद राजू एनएस ने कहा कि समिति की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। रिपोर्ट में जो निर्देश होगा उसका पालन कराया जाएगा।