यूपी का वाराणसी, आगरा और प्रयागराज की तरह उन शहरों की सूची में शामिल हो गया है, जिनके पास दूषित जल को शोधित कर सुरक्षित दोबारा इस्तेमाल करने की अपनी कार्ययोजना है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने इसे जल संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने सोमवार को यहां जल संसाधन सचिवों के सम्मेलन में इस कार्ययोजना का अनावरण किया। इस दौरान जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी और जल संसाधन सचिव वीएल कांत राव भी मौजूद रहे।
इस विस्तृत योजना का मुख्य उद्देश्य सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से साफ किए गए पानी को मांग वाले क्षेत्रों से जोड़ना है। कार्ययोजना में बताया गया है कि शोधित जल का इस्तेमाल थर्मल पावर प्लांटों, रेलवे, शहरी सौंदर्यीकरण और कृषि सिंचाई में कैसे किया जा सकता है।
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के मुताबिक, यह कार्ययोजना बताती है कि शोधित दूषित जल के सुरक्षित दोबारा इस्तेमाल (एसआरटीडब्ल्यू) पर तैयार राष्ट्रीय मसौदा वास्तविक धरातल पर आकार ले रहा है।