शास्त्रीय गायिका डॉ. अर्चना म्हस्कर ने कहा कि संगीत एक ऐसी शक्ति है जिसके द्वारा हम ईश्वर से सीधे जुड़ सकते हैं। संगीत चिंतन है। मनन है। समर्पण है। संगीत हमें भौतिक घटनाओं से दूर करती है। वह बृहस्पतिवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के वेद विज्ञान अनुसंधान केंद्र के तत्वावधान में आयोजित वेद व्याख्यानमाला के तहत आयोजित संगीत चिकित्सा पर व्याख्यान दे रही थीं।
डॉ. अर्चना ने कहा कि सामवेद से संगीत की उत्पत्ति हुई है। अथर्ववेद मे बहुत ऐसे मंत्र हैं जिनसे चिकित्सा होती है। गंभीर आवाज से पित्त का उपचार होता है, मीठी आवाज से कफ को दूर किया जाता है। शब्द कौतुहल में ध्वनियों से रोगों का निवारण का वर्णन मिलते हैं। समुद्रगुप्त के वीणावादन के समय बसंत ऋतु का आभास होता था। अध्यक्षता कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने किया। इस दौरान प्रो. महेंद्र नाथ पांडेय, प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी, प्रो. रमेश प्रसाद, प्रो. अमित कुमार शुक्ला, डॉ. सत्येंद्र कुमार यादव मौजूद रहे।