डीजल के धुएं से हवा में बढ़े प्रदूषक तत्व
- नदी विज्ञानी डॉ. बीडी त्रिपाठी ने बताया कि डीजल नावों के संचालन से हवा में कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर की मात्रा बढ़ रही है। गंगा में भी प्रदूषण बढ़ रहा है। डीजल इंजन के धुएं के कारण प्रदूषक तत्व गंगा की ऊपरी सतह पर जमकर प्रदूषित कर रहे हैं। इसका सीधा असर गंगा में रहने वाले जलीय जीवों पर पड़ता है और उनका सांस लेना मुश्किल होता है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार 2024 में 1217 नावों का लाइसेंस जारी किया गया था। 809 को सीएनजी में बदला गया था और 286 नावें चप्पू वाली थीं। वर्तमान में 60 फीसदी से अधिक नावों का संचालन डीजल इंजन से किया जा रहा है।
- बीएचयू के पर्यावरणविद प्रो. कृपा राम का कहना है कि ठंड बढ़ने के कारण हवा में प्रदूषक तत्वों की मात्रा में बढ़ोतरी हो रही है। ठंड के कारण प्रदूषक तत्व हवा में घुल नहीं पा रहे हैं और इस कारण हवा में धूल कण, कार्बन मोनोआक्साइड की मात्रा बढ़ गई है। इस तरह के वातावरण में बाहर निकलने से पहले मास्क पहनना जरूरी है। नहीं तो फेफड़ों में संक्रमण की आशंका है। साथ ही सीओपीडी के मरीजों की समस्या भी बढ़ेगी। विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
जानकारों का कहना है कि योग करने के दौरान हमारा शरीर वायु की अधिकतम मात्रा ग्रहण करता है। ऐसे में ऑक्सीजन के साथ प्रदूषण के घातक कण फेफ ड़े तक पहुंच जाते हैं। इस लिहाज से घाट किनारे सुबह-सुबह योग करना भी रोग का कारण बन सकता है। खतरनाक कण हमारे रक्त में घुलकर घातक बीमारियों को जन्म देते हैं।