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Varanasi Weather: दिल्ली से ज्यादा प्रदूषित काशी की हवा, AQI 392, घाट किनारे आंखों में हो रही जलन; जानें वजह

Sun, 23 Nov 2025 08:52 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी शहर के बाद अब गंगा किनारे की हवा जहरीली होती जा रही है। मनोरंजन के नाम पर होने वाली लापरवाही अब भारी पड़ने लगी है। घाट किनारे व्यायाम करने वालों की सांसें भी फूलने लगी हैं। लोग व्यायाम भी नहीं कर पा रहे हैं।
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वाराणसी के अस्सी घाट पर ऐसा दिखा नजारा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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UP Weather News: गंगा की लहरों पर अब डीजल का काला धुआं तैर रहा है। ये धुआं गंगाजल के साथ ही हवा में घुलकर इसे जहरीला बना रहा है। हालत यह है कि घाट किनारे शाम को खड़े होने पर आंखों में जलन हो रही है। बनारस का एयर क्वालिटी इंडेक्स ( एक्यूआई) 392 दर्ज किया गया। जबकि दिल्ली का एक्यूआई 311 रहा। 

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गंगा में अस्सी से राजघाट के बीच डीजल वाली नावों का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। वर्तमान में 60 फीसदी नावों का संचालन डीजल इंजन से हो रहा है। शाम को घाटों पर दूर-दूर तक काले धुएं की चादर नजर आ रही है। 

एयर क्वालिटी डॉट इन के अनुसार पीएम 2.5 271, पीएम 10 की 346 और कार्बन मोनोआक्साइड की अधिकतम मात्रा 441 रही। नगर निगम के पीआरओ संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि शहर में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए मुख्य मार्ग पर स्प्रिंकलर व वाटर कैनन से पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। 

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डीजल के धुएं से हवा में बढ़े प्रदूषक तत्व
  • नदी विज्ञानी डॉ. बीडी त्रिपाठी ने बताया कि डीजल नावों के संचालन से हवा में कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर की मात्रा बढ़ रही है। गंगा में भी प्रदूषण बढ़ रहा है। डीजल इंजन के धुएं के कारण प्रदूषक तत्व गंगा की ऊपरी सतह पर जमकर प्रदूषित कर रहे हैं। इसका सीधा असर गंगा में रहने वाले जलीय जीवों पर पड़ता है और उनका सांस लेना मुश्किल होता है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार 2024 में 1217 नावों का लाइसेंस जारी किया गया था। 809 को सीएनजी में बदला गया था और 286 नावें चप्पू वाली थीं। वर्तमान में 60 फीसदी से अधिक नावों का संचालन डीजल इंजन से किया जा रहा है। 
  • बीएचयू के पर्यावरणविद प्रो. कृपा राम का कहना है कि ठंड बढ़ने के कारण हवा में प्रदूषक तत्वों की मात्रा में बढ़ोतरी हो रही है। ठंड के कारण प्रदूषक तत्व हवा में घुल नहीं पा रहे हैं और इस कारण हवा में धूल कण, कार्बन मोनोआक्साइड की मात्रा बढ़ गई है। इस तरह के वातावरण में बाहर निकलने से पहले मास्क पहनना जरूरी है। नहीं तो फेफड़ों में संक्रमण की आशंका है। साथ ही सीओपीडी के मरीजों की समस्या भी बढ़ेगी। विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
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घाट किनारे योग करना भी घातक

जानकारों का कहना है कि योग करने के दौरान हमारा शरीर वायु की अधिकतम मात्रा ग्रहण करता है। ऐसे में ऑक्सीजन के साथ प्रदूषण के घातक कण फेफ ड़े तक पहुंच जाते हैं। इस लिहाज से घाट किनारे सुबह-सुबह योग करना भी रोग का कारण बन सकता है। खतरनाक कण हमारे रक्त में घुलकर घातक बीमारियों को जन्म देते हैं।
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