आम जनता के लिए वाराणसी के कैटोंमेंट स्थित करियप्पा मार्ग फिलहाल मंगलवार से खोल दिया गया है। यह मार्ग पिछले 27 सालों से बंद था। सेना की सुरक्षा व गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए इसे बंद कर दिया गया था। मार्ग के खुलने से लोगों को काफी सहूलियत हुई है। हालांकि मार्ग कब तक खुला रहेगा, यह व्यवस्था स्थाई है या कुछ दिनों के लिए, इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से अधिकारी बचते रहे।
बीएचयू, डीएलडब्ल्यू, गंगापुर, लोहता, रोहनियां भदोही, मिर्जापुर आदि क्षेत्र से आने वाले हजारों की संख्या किसान, मजदूर, अधिवक्ता, सरकारी, गैर सरकारी, कर्मचारी स्कूली बच्चों को इस मार्ग के खुल जाने से राहत मिलेगी। अभी उन्हें लंबा चक्कर काट कर जाना पड़ता है।
इस मार्ग को खुलवाने के लिए कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने 21 मई 92 को आत्मदाह की धमकी भी दी थी। मामले की गंभीरता पर तत्कालीन रक्षा मंत्री शरद पवार को यहां भेज गया था। पराड़कर भवन में शरद पवार ने एलान किया था कि सेना की ओर से बंद किये गए इस मार्ग पर मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि 06 सितंबर 92 से पैदल साइकिल तथा हेलमेट लगाकर मोटर साइकिल सवार इस रास्ते जा सकेंगे।
बाद में फिर से मार्ग को बंद कर दिया गया। परिणाम यह हुआ कि लोगों की समस्या जस की तस बनी रही। पूर्व रक्षा मंत्री के तौर पर मुलायम सिंह यादव के छावनी आगमन के दौरान बोर्ड की बैठक में अन्य मुद्दों के अलावा उपाध्यक्ष डॉ. आनंद मिश्रा, सदस्य उस्मान अली, जटा शंकर मिश्रा, शैलेंद्र सिंह, भैया लाल आदि ने करियप्पा मार्ग खोलने की मांग हुई। फिलहाल आम आदमी के आवागमन के लिए खुले इस मार्ग के कारण दूरदराज से मुख्यालय आने वाले व एयरपोर्ट की तरफ जाने वाले लोगों को राहत होगी।