वाराणसी। पचास हजार के इनामी बदमाश राजेश दुबे उर्फ टुन्ना के मारे जाने की सूचना पर बुधवार को उसके बड़े भाई ओमप्रकाश दुबे और बहन अनीता पांडेय बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद हालत यह थी कि टुन्ना की अर्थी को कंधा देने के लिए चार लोग भी नहीं थे। शव की अंत्येष्टि के लिए भाई-बहन के पास पर्याप्त पैसे भी नहीं थे। उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय देख एसटीएफ के इंस्पेक्टर विपिन राय और पुनीत परिहार ने पैसे दिए तो टुन्ना का शव अंत्येष्टि के लिए हरिश्चंद्र घाट ले जाया गया।
रिटायर्ड सैनिक के बेटे ओमप्रकाश ने बताया कि टुन्ना जब 10वीं में पढ़ता था, तभी उसका गांव में विवाद हुआ था। गांव के लोगों ने उसे फर्जी मुकदमे में फंसा कर जेल भिजवा दिया। इसके बाद वह समाज की मुख्य धारा से नहीं जुड़ सका। बीते 10 साल से टुन्ना से बात और मुलाकात नहीं हुई थी। इस बीच पुलिस के लगातार छापे के कारण सभी भाई गांव छोड़ कर बाहर चले गए। ओमप्रकाश ने बताया कि वह जीविकोपार्जन के लिए वह सात हजार रुपये प्रतिमाह पर नौकरी करता है। भाई भले ही अपराध करता रहा, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति दयनीय ही बनी रही।
डीएसपी विनोद कुमार सिंह के अनुसार, टुन्ना के भाई और पहले इनामी बदमाश रहे आनंद दुबे का भी गिरोह है। टुन्ना ने ज्यादातर हत्या और रंगदारी की वारदात को अकेले ही अंजाम दीं, लेकिन वह आनंद के गिरोह से भी जुड़ा था। मौके से भागे टुन्ना के साथी बदमाश, आनंद और उसके गिरोह के बदमाशों पर शिकंजा कसा जाएगा। इस संबंध में गाजीपुर, चंदौली और वाराणसी जिले की पुलिस के साथ जरूरी सूचनाएं साझा की गई है।