वाराणसी। महंत आवास के मलबे से निकले बाबा विश्वनाथ के सिंहासन का रविवार को मूल्यांकन किया गया। स्वर्णकार ने परीक्षण के बाद बताया कि सिंहासन को 70 फीसदी क्षति पहुंची है। सिंहासन को मूल स्वरूप में लाने में कम से कम दो महीने लगेंगे। सिंहासन के चारों खंभों सहित निचले हिस्से को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। बाबा का झूला, छत्र और प्राचीन पालकी भी मलबे में दबने के कारण क्षतिग्रस्त हुई है।
रविवार को स्वर्णकार और बढ़ई ने रजत सिंहासन में लकड़ी और चांदी के नुकसान का परीक्षण किया। चांदी के पत्तरों पर नक्काशी और लकड़ी भी टूट गई है। पुराने चित्रों के आधार पर रजत सिंहासन के गुंबद वाले हिस्से को तैयार कराया जाएगा। मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने कहा कि परिवार के सभी सदस्यों ने टेढ़ीनीम स्थित गेस्ट हाउस में बैठक की है। बैठक में तय किया गया है कि महंत परिवार अपने खर्च पर ही रजत सिंहासन का निर्माण कराएगा।