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गांधर्व महोत्सव में सुर, लय, ताल की लयकारी

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गांधर्व महोत्सव की पहली निशा अस्सी घाट पर रविवार को गुलजार हुई। दो दिवसीय सांस्कृतिक संध्या की प्रथम निशा की शुरूआत विशाल कृष्णा के कथक से हुई। विशाल ने बनारस घराने की प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने गंगा स्तुति, गुरु वंदना एवं बंदिशों पर मनोहारी नृत्य की प्रस्तुति की। साथ में श्रीयाना कृष्ण, अर्चना सिंह एवं नूरिया कॉबो ने संगत की।
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दूसरी प्रस्तुति में बांसुरी वादक राजेंद्र प्रसन्ना ने राग गावती की अवतारण कर वातावरण को मधुरस से सिक्त कर दिया। वादन में चयनदारी स्वरों की बढ़त एवं तान की खनक आपकी गायकी अंग की विशेषता रही। वादन में आलाप के पश्चात एकताल ताला में विलंबित एवं द्रुत तीन ताल में प्रस्तुत किया। आपके साथ बांसुरी पर शिष्य मोहन कृष्ण ने संगत की। तबले पर पं. कुबेर नाथ मिश्र ने बेहतरीन साथ दिया। दिल्ली से पधारे अजराड़ा घराने के तबला वादक उस्ताद अकरम खां ने तबला सोलो की प्रस्तुति दी। तबले पर तीन ताल में अपने घराने की कई चुनिंदा बंदिशों को प्रस्तुत किया। हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्र ने संगत की। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति में मुंबई से पधारी मेवाती घराने की गायिका विदुषी देवकी पंडित ने श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। राग बागेश्वरी एवं राग सोहनी में प्रस्तुतियां हर किसी के मन को छू गईं। तबले पर नंद किशोर मिश्र ने संगत की।
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