जाम से निजात दिलाने के लिए जितना प्रयोग यहां हुआ, उतना प्रदेश के दूसरे शहरों में नहीं हुआ। पांच साल में अनगिनत अभियान चलाए गए। कभी वन-वे लगाया गया, तो कभी यू-टर्न की सुविधा दी गई। मैदागिन–गोदौलिया और सोनारपुरा–गादौलिया मार्ग पर कार, ऑटो और ई-रिक्शा प्रतिबंधित किए गए। नामोघाट–भैसासुर घाट–भदऊं चुंगी मार्ग को वन-वे किया गया। पुलिस की समीक्षा बैठक में ट्रैफिक व्यवस्था हमेशा कोर मुद्दा रही।
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भारी वाहनों और नई संरचनाएं
सात फ्लाईओवर, आरओबी, एक ब्रिज और आउटर रिंग रोड वाहनों को डायवर्ट करने के लिए बनाए गए हैं। सामनेघाट–रामगनर ब्रिज और एक आउटर रिंग रोड, एक सिक्स लेन और फोरलेन सड़कों से वाहनों का दबाव काफी हद तक कम हुआ, लेकिन शहर में जाम की समस्या कम नहीं हुई।
शहर की आबादी लगभग 40 लाख है और महज 21 स्थायी पार्किंग स्थल हैं। एक साल में पर्यटक आए – 14.70 करोड़ (देशी और विदेशी)। औसतन 30 दिन में 1.22 करोड़ लोग, रोजाना 41,300 लोग शहर आते हैं। शहर में चार अस्थायी पार्किंग के अलावा कुल 17 पार्किंग स्थल हैं।
जाम के कारण
- कचहरी के चारों तरफ सड़क पर पार्किंग
- शहर में पार्किंग की कम
- शहर में विकास परियोजनाओं के कारण यातायात बाधित
- अवैध वाहनों का संचालन, रोजाना बढ़ते वाहन, अतिक्रमण
- आए दिन वीवीआईपी मूवमेंट
- बिना किसी पूर्व सूचना के निर्माण कार्य
- शहर के अंदर संकरी सड़कें, मनमाना और बेतरतीब खड़े वाहन
- यातायात पुलिस की ओर से नियमों का कड़ाई से पालन नहीं
- नानो पार्किंग जोन में वाहन
10 प्रमुख चौराहों- मैदागिन, गोदौलिया, लंका, रथयात्रा, सिगरा, कैंट, चौकाघाट, भेलूपुर, लहरतारा और पांडेयपुर पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।
यातायात की समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सभी चौराहों पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी लगाए गए हैं। इसके अलावा कंट्रोल रूम से भी लगातार निगरानी की जा रही है।
-अंशुमान मिश्रा, एडीसीपी ट्रैफिक