सुरों की मलिका ठुमरी साम्राज्ञी पद्मविभूषण गिरिजा देवी का मंगलवार की रात कोलकाता के बिड़ला मेमोरियल अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने के कारण निधन हो गया। चिकित्सकों ने दिल का दौरा पड़ने के बाद उनकी चेतना वापसी के लिए हरसंभव प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हुए।
गिरिजा देवी 88 वर्ष की थीं। उनके निधन से भारतीय शास्त्रीय संगीत में लोच भरी पूरब अंग की गायकी के एक युग ने ठहराव ले लिया। अप्पा जी के चिरनिद्रा में लीन होने की सूचना मिलते ही देश-दुनिया के शास्त्रीय संगीत प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई।
शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत में निष्णात गिरिजा देवी की गायकी में बनारस और सेनिया घराने की अदायगी का विशिष्ट माधुर्य, अपनी पारंपरिक विशेषताओं के साथ विद्यमान था।
ध्रुपद, खयाल, टप्पा, तराना, सदरा और पारंपरिक लोक संगीत में होरी, चैती, कजरी, झूला, दादरा और भजन के अनूठे प्रदर्शनों के साथ ही उन्होंने ठुमरी के साहित्य का गहन अध्ययन और अनुसंधान भी किया। गिरिजा देवी ने कई रचनाओं को अपनी आवाज देकर भारतीय संगीत प्रेमियों को सुर, लय और ताल की नई बारीकियों से परिचित कराया था।
कोलकाता की अपनी संगीत एकेडमी में ही दो दिन पहले अप्पा जी को सांस लेने में तकलीफ शुरू हुई थी। तब उन्होंने अस्पताल जाने से मना कर दिया था। लोगों के आग्रह पर चिकित्सक को दिखाने के बाद उनकी हालत में सुधार आ गया था।
मंगलवार की दोपहर उनके सीने में फिर तेज दर्द उठा और सांस लेने में तकलीफ होने लगी। आनन-फानन में उनकी पुत्री मुन्नी देवी व अन्य शिष्याएं उनको अस्पताल ले गईं। वहां उन्हें आईसीयू में वेंटीलेटर पर रखा गया। रात 9:30 बजे उन्हें तेज दौरा पड़ा और सांस की गति ठहर गई।
चिकित्सकों के मुताबिक दिल का दौरा पड़ने से अप्पा जी की हालत बेकाबू हो गई। कोशिश बहुत की गई और आक्सीजन देने के साथ ही कार्डियक मसाज भी किया गया लेकिन जान नहीं बचाई जा सकी।
उनके निधन पर पद्मभूषण पं. राजन मिश्र, पं. साजन मिश्र, पं. छन्नूलाल मिश्र, पद्मश्री सोमा घोष, पं. शिवनाथ मिश्र, राजेश्वर आचार्य, प्रो. ऋत्विक सान्याल समेत संगीत जगत की हस्तियों ने गहरा शोक जताया है।