डॉ. महेंद्र नाथ से बातचीत करते सीएम योगी
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के गृह जिला चंदौली में आज सीएम योगी आ रहे हैं। दो दशक बाद चंदौली की धरती पर किसी दूसरे भाजपा के मुख्यमंत्री का आगमन हो रहा है।इससे पहले 1997 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह आए थे। उन्होंने नगर पालिका के प्रस्तावित नए कार्यालय का शिलान्यास किया था। लेकिन कुछ अड़ंगों के कारण कार्यालय निर्माण का कार्य परवान नहीं चढ़ सका।
जनपद निवासी केंद्रीय गृहमंत्री व 2000 में प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे राजनाथ ने जनपद में किसी योजना का शिलान्यास नहीं किया था। दो दशक पूर्व नगर पालिका की तत्कालीन बोर्ड ने नगर पालिका कार्यालय को तोड़कर व्यवसायिक कांपलेक्स बनाने व कार्यालय को चंदासी के पास स्थापित करने के लिए योजना बनाई थी।
इसके लिए तत्कालीन बोर्ड के मुखिया सरस्वती देवी चौहान ने चंदासी में कार्यालय की जमीन की तलाश कर उस समय मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह से शिलान्यास कराया था। नगर पालिका सूत्रों के मुताबिक उस समय कोई प्रस्ताव बोर्ड में नहीं था। इसके बाद जमीन स्वामी से विवाद के कारण कार्यालय का निर्माण कार्य अधर में रह गया।
उस समय के जिलाधिकारी ने विवाद के चलते इस योजना को रद्द कर दिया। 1997 से 2002 तक भाजपा के तीन मुख्यमंत्री रहे। इसमें कल्याण सिंह के बाद रामप्रकाश गुप्त, इसके बाद राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री बने। राजनाथ सिंह का गृह जनपद चंदौली है।
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने जनपद में किसी योजना का शिलान्यास नहीं किया। दो दशक के बाद जनपद की धरती पर किसी भाजपाई मुख्यमंत्री का आगमन हो रहा है। 25 अक्तूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ रेलवे ओवर ब्रिज का शिलान्यास करेंगे।
वह जनपद के विकास से संबंधित दो सौ करोड़ रुपये की योजनाओं की सौगात देंगे। दो दशक बाद जनपद में मुख्यमंत्री के आगमन से लोगों के अलावा भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह है।
मुख्यमंत्री की मेजबानी को तैयार धान का कटोरा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
चंदौली जिला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मेजबानी के लिए तैयार है। 25 अक्तूबर को सीएम महेंद्र टेक्निकल इंटर कालेज परिसर में बने मंच से जनपद वासियों को संबोधित करेंगे। उनके आगमन को लेकर नक्सल प्रभावित जिले के लोगों की उम्मीदें परवान चढ़ चुकी हैं।
वैसे तो दो सौ करोड़ रुपये लागत की 18 परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास का खाका तैयार है। लेकिन लोगों को आशा है कि सीएम जिले को इससे अधिक देकर जाएंगे।
जनपदवासी खुले दिल से सीएम के स्वागत के लिए तैयार हैं। किसान, युवा और छात्र सभी को उम्मीद है कि दो घंटे के जनपद प्रवास के बाद जब मुख्यमंत्री यहां से जाएंगे तो जनपद को सौगातों से भर देंगे। आम लोगों के साथ-साथ भाजपा कार्यकर्ता भी काफी उत्साहित हैं।
देश के सबसे बड़े सूबे के मुखिया को देखने और सुनने के लिए लोग उत्सुक हैं। कार्यक्रम स्थल पर एक लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीद हैं। इसी संख्या को लेकर प्रशासनिक तैयारियां भी की गई हैं।
शिलान्यास के लिए प्रस्तावित कार्य
1. जिला मुख्यालय पर 33 करोड़ 47 लाख की लागत से 633 मीटर का रेलवे ओवरब्रिज।
2. चहनियां-धानापुर से महुजीं-जमानियां मार्ग का चौड़ीकरण
3. बबुरी-धरौली मार्ग का चौड़ीकरण
4. बनौली खुर्द और खजूरगांव में विद्युत उपकेंद्र,
5. मुगलसराय में पाथवे निर्माण, जलनिकासी व्यवस्था और रेलवे पुल पर रेंलिंग का निर्माण।
लोकार्पण के लिए प्रस्तावित कार्य
1. अलीनगर-सकलडीहा मार्ग का सुदृढ़ीकरण
2. गोलाबाद से अमदहां लौवारी संपर्क मार्ग।
3. मझगांवा पुल से नर्वदापुर तक सड़क निर्माण
4. चकिया-अहिरौरा रोड से लठियां व हिनौता तक सड़क निर्माण
5. मझवार में आसरा योजना।
6. कंदवां, धानापुर, इलिया, चकरघट्टा और मझगांवां में अष्टकोणीय थाना भवन।
सपा के पूर्व सांसद ने ओवरब्रिज का भेजा था प्रस्ताव
रेलवे पुल
- फोटो : demo
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को चंदौली मझवार स्टेशन पर ओवरब्रिज का शिलान्यास करेंगे। उपरिगामी पुल बनाने का प्रस्ताव समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद रामकिशुन ने कार्यकाल के दौरान भेजा था। इसे पिछली सरकार ने संस्तुति कर केंद्र सरकार को भेज दिया था। पूर्व सांसद ने इस मामले को संसद में भी उठाया था। लेकिन इसका श्रेय वर्तमान भाजपा सांसद डा. महेंद्र नाथ पांडेय को मिल रहा है।
चंदौली जिला बनने के बाद मुख्यालय स्थापित होने से वहां की आबादी और समस्याएं बढ़ने लगी। सकलडीहा चंदौली मार्ग पर रेलवे क्रासिंग है। मुगलसराय मंडल में यह सबसे व्यस्त रेल मार्ग है। इससे इस मार्ग पर जाम की स्थिति बनी रहती है। 2009 से 2014 तक चंदौली के सांसद रहे रामकिशुन यादव ने समस्या को देखते हुए ब्रिज के लिए पहल आरंभ की थी।
उन्होंने रेल अधिकारियों के साथ बैठक कर समस्या पर मंथन किया। इसके बाद अधिकारियों के साथ प्रस्ताव बनवा कर प्रदेश सरकार को भेजा। प्रदेश सरकार की ओर से संस्तुति पत्र लगाकर केंद्र सरकार व रेल मंत्रालय को भेज दिया गया। पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने संसद में भी इस मुद्दे को उठाया था। इसके बाद आवरब्रिज बनाने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया।
इसके बार भूमि की पैमाइश, उसकी जांच व माप तथा प्राक्कलन तैयार किया गया। इसी बीच सरकार बदल गई। तीन साल में वर्तमान सांसद ने पहल कर पुल निर्माण को अमली जामा पहनाना आरंभ कर दिया। सांसद डा. महेंद्रनाथ पांडेय ने इस मसले को फिर से उठाया। प्रदेश व केंद्र में पार्टी की सरकार होने के कारण प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई। इसके लिए धन भी आवंटित हो गया।