सरैयां डॉट पुल के नीचे से भारी वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है। दुपहिया वाहनों के लिए भी इसे वन-वे ही रखा गया है। यह निर्णय पुल के बेहद कमजोर हो जाने के चलते लिया गया है। इस रास्ते पर यातायात सुचारु होने के लिए लोगों को कम से कम एक साल तक इंतजार करना होगा।
नई व्यवस्था लागू करने के बाद इस रूट से जाने वाला ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया गया है। अब गाजीपुर की ओर जाने वाले भारी वाहन कैंट से पुलिस लाइन होते हुए पहड़िया-आशापुर के रास्ते आगे जा रहे हैं। शहर में घनी आबादी के बीच से होकर गुजर रहे ये वाहन आए दिन हादसों का सबब भी बन रहे हैं।
सोमवार को पहड़िया चौराहे पर गाजीपुर की ओर से आ रही निजी बस की चपेट में आने से चौबेपुर के प्रवीण की मौत की वजह भी यही रही। सरैयां डॉट पुल के नीचे से गुजरने वाले ओवरलोडेड भारी वाहनों की लगातार टक्कर (हिट एंड स्ट्रेच) से पुल की घुमावदार दीवार की ईंटों की दो परतें उखड़ चुकी हैं।
रेलवे के आला अफसरों को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने स्थानीय रेल अधिकारियों को जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। तब रेलवे की ओर से इस संबंध में जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया। पत्राचार के बाद डॉट पुल के नीचे से भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी।
छोटे वाहनों के लिए भी केवल वन-वे व्यवस्था लागू की गई है। रेल अधिकारियों की मानें तो अभी इस डॉट पुल के निर्माण में साल भर से ज्यादा का वक्त लगेगा।
आजादी से पहले बाढ़ के दौरान वरुणा का पानी निकलने के लिए सरैयां में रेलवे डॉट पुल का निर्माण हुआ था। बाद में इसके नीचे सड़क बन गई और परिवहन शुरू हो गया। इस डॉट पुल की चौड़ाई 6.1 मीटर है और ऊंचाई महज ट्रक और बस निकलने भर की है।