जिन ऐतिहासिक, पुरातात्विक धरोहरों को देखने के लिए देश-दुनिया से सैलानी सारनाथ आते हैं, उनकी सुरक्षा की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
एक तरफ भारतीय पुरातत्व सर्र्वेक्षण (एएसआई) की ओर से इनके संरक्षण की प्लानिंग हो रही है, वहीं दूसरी तरफ उसके ही अधिकारी-कर्मचारी नियम-निर्देशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
उदाहरण के तौर पर धमेख स्तूप को आप देख सकते हैं। यहां खाते में कंकड़, सिक्के बांधकर उसे स्तूप पर फेंका जाता है। इससे स्तूप की दीवारें क्षतिग्रस्त होती रहती हैं लेकिन कभी कोई रोकटोक नहीं होती।
वहीं, स्तूप पर खातों का ढेर जमा होने के बाद इनकी सफाई के नाम पर भी खुलेआम मनमानी की जाती है। मंगलवार को भी आधा दर्जन से अधिक कर्मचारियों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के स्तूप पर चढ़ा दिया गया।
स्तूप पर मनमाने तरीके से चहलकदमी करते हुए खातों को समेटने-हटाने का काम चला। जबकि, धरोहरों पर चहलकदमी की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती।
संरक्षण से जुड़े कार्य भी एएसआई के विशेषज्ञों की देखरेख में कराए जाते हैं लेकिन यहां न कर्मचारियों के जान की परवाह की गई न ही स्तूप की सुरक्षा की। इस मामले में वरिष्ठ संरक्षक सहायक पीके त्रिपाठी ने कहा कि खाता न फेंकने के लिए सभी बौद्ध मंदिरों के प्रभारियों को पत्र लिखा गया है।
इससे स्तूप की दीवारों को नुकसान तो हो रहा है लेकिन यह मसला श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा होने के नाते हम लोग चाहकर भी कोई ठोस कदम नहीं उठा पाते हैं। सुरक्षा कर्मियों के मना करने पर अनुयायी उनसे उलझ जाते हैं।
सुरक्षा की अनदेखी न होने पाए, इसका हर स्तर पर प्रयास किया जाता है।