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जमीन में चूहों की सुरंग: खतरे में 20 हजार घरों का सीवर नेटवर्क, पक्का महाल में में बढ़ा जमीन धंसने का खतरा

Thu, 09 Jul 2026 04:40 PM IST
Pragati Chand गुंजन श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।

सार

वाराणसी के पक्का महाल में चूहों से सीवर नेटवर्क पर संकट गहरा रहा है। चूहों के सुरंगों से जमीन खोखली हो रही है। ऐसे में 20 हजार घरों का सीवर नेटवर्क भी खतरे में है। 
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चूहों ने बढ़ाई चिंता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सदियों पुराने पक्का महाल क्षेत्र में चूहे सीवर नेटवर्क के आसपास सुरंगें बनाकर मिट्टी को खोखला कर रहे हैं। इसका असर अब सीवर चैंबरों की दीवारों और नींव पर दिखने लगा है। सफाई के दौरान जलकल विभाग को कई चैंबरों की ईंटें खिसकी मिल  रही हैं। इससे सीवर संरचना कमजोर हो रही है और उसके आसपास मिट्टी का कटान भी हो रहा है। ऐसे में सीवर चैंबरों के आसपास धीरे-धीरे जमीन धंसने और सिंकहोल बनने का खतरा बढ़ रहा है। 

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पक्का महाल क्षेत्र में करीब 20 हजार घर हैं। आशंका है कि यदि चूहों ने सीवर लाइन तक सुरंग बना ली है, तो वे मकानों के नीचे तक भी पहुंच चुके होंगे। काशी के पक्का महाल की सबसे बड़ी चुनौती अब केवल जाम सीवर या पुरानी पाइपलाइन नहीं, बल्कि जमीन के नीचे तेजी से फैलता चूहों का नेटवर्क बनता जा रहा है। 

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जलकल विभाग के अनुसार दशाश्वमेध, चौक, बंगाली टोला, जंगमबाड़ी, शिवाला, प्रह्लाद घाट, दुर्गाकुंड, नगवां, नरिया और हुकुलगंज समेत कई इलाकों में सीवर चैंबरों की मरम्मत के दौरान ईंटें खिसकी हुईं और नीचे की मिट्टी खोखली मिली है।तकनीकी रूप से यह समस्या केवल चूहों तक सीमित नहीं है। 

चूहे सीवर लाइन और चैंबर के किनारे सुरंग बनाते हैं, जिससे आसपास की मिट्टी ढीली होती जाती है। यदि कहीं से पानी का रिसाव भी हो, तो मिट्टी के महीन कण बहने लगते हैं। धीरे-धीरे अंदर खाली जगह (वॉयड) बन जाती है। ऊपर का भार बढ़ने पर चैंबर धंस सकता है या सड़क बैठ सकती है। 

यही प्रक्रिया दुनिया के कई शहरों में सिंकहोल बनने की प्रमुख वजह मानी गई है।विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य सीवर में जब खाने-पीने का कचरा तथा होटलों और घरों का जैविक अपशिष्ट पहुंचता है, तो वह चूहों के लिए भोजन बन जाता है। भोजन मिलने से उनकी संख्या बढ़ती है और वे स्थायी बिल बना लेते हैं।
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पक्का महाल की चुनौती इसलिए और गंभीर है, क्योंकि यहां अधिकांश गलियां संकरी हैं और नीचे दशकों पुराना सीवर नेटवर्क बिछा है। किसी भी हिस्से में खोदाई आसान नहीं है। ऐसे में यदि जमीन के भीतर लगातार खाली स्थान बनते रहे, तो भविष्य में मरम्मत की लागत और जोखिम दोनों बढ़ सकते हैं। जलकल विभाग फिलहाल क्षतिग्रस्त चैंबरों की मरम्मत करा रहा है, लेकिन चूहों की संख्या नियंत्रित करने या वैज्ञानिक निगरानी की कोई अलग व्यवस्था नहीं है।

ऐसे खोखली होती है जमीन
चूहे सीवर चैंबर के किनारे बिल बनाते हैं। सुरंग बनने से मिट्टी की पकड़ कमजोर हो जाती है। पाइप या चैंबर से रिसाव होने पर मिट्टी बहने लगती है। इससे अंदर खाली जगह (वॉयड) बन जाती है। ऊपर से दबाव बढ़ने पर चैंबर या सड़क धंस सकती है।
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