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Varanasi Serial Blast Case: वाराणसी धमाकों के दोषी वलीउल्लाह को फांसी की सजा, 16 साल बाद पीड़ित परिवारों के जख्म पर लगा मरहम

Mon, 06 Jun 2022 05:19 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

सात मार्च 2006 की शाम वाराणसी में हुए धमाकों के दोषी वलीउल्लाह को फांसी की सजा सुनाई गई है। अदालत के फैसले से इस बमकांड में अपनों को खो देने वाले परिवारों के जख्मों पर 16 साल बाद न्याय का मरहम लगा है।
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वाराणसी सीरियल बम धमाके का दोषी वलीउल्लाह - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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वाराणसी सीरियल धमाके में दोषी वलीउल्लाह का गाजियाबाद की अदालत ने सजा ए मौत की सजा सुनाई है। वाराणसी बम कांड में अदालत के फैसले से इस घटना में अपनों को खो देने वाले परिवारों के जख्मों पर 16 साल और दो महीने बाद न्याय का मरहम लगा है। गमजदा परिवारों को लंबे अर्से बाद न्याय मिलने से सुकून के कुछ पल मिले हैं।

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बनारस की जनता, पीड़ित, उनके परिवारों और गवाहों ने अदालत के इस फैसले की खुले कंठ से सराहना की है। अदालत ने जब वलीउल्लाह दोषी करार दिया तो सभी सभी ने  कहा था कि फांसी की सजा से कम मंजूर नहीं है। सोमवार को जब वलीउल्लाह को सजा ए मौत देने के फैसले को सुनकर पीड़ित परिवारों के चेहरे की मायूसी कम हुई।

टीवी से जानकारी मिलने के बाद बमकांड के पीड़ित अस्सी निवासी विद्याभूषण मिश्र की आंखें आंसुओं से भर गई। संकट मोचन मंदिर में परिवार के संग दर्शन पूजन को गए विद्या भूषण की डेढ़ साल की बेटी शिवांगी की धमाके मौत हो गई थी। जबकि भतीजी गरिमा और पत्नी सुशीला भी धमाके में घायल हुई थी।

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संकट मोचन और दशाश्वमेध घाट पर हुए थे धमाके

वाराणसी में 16 साल पहले सीरियल ब्लास्ट - फोटो : सोशल मीडिया।
जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चंद्र शर्मा ने बताया कि सात मार्च 2006 की शाम पहला बम धमाका शाम 6.15 बजे संकटमोचन मंदिर में हुआ था। इसमें सात लोग मारे गए थे और 26 घायल हुए थे। 15 मिनट बाद 6.30 बजे दशाश्वमेध मार्ग पर कुकर बम मिला था।

पांच मिनट बाद 6.35 बजे कैंट रेलवे स्टेशन पर प्रथम श्रेणी विश्राम कक्ष के सामने धमाका हुआ था। यहां 9 लोग मारे गए थे और 50 घायल हुए थे। मामले में चार अन्य आतंकियों के नाम सामने आए थे। एक आतंकी व बम धमाके का मास्टरमाइंड मोहम्मद जुबैर कश्मीर में हुए मुठभेड़ में मारा जा चुका है।

बनारस ब्लास्ट से पहले भी पकड़ा जा चुका था वलीउल्लाह

संकटमोचन मंदिर में ब्लास्ट के बाद का नजारा - फोटो : अमर उजाला
 फूलपुर (प्रयागराज) के एक मदरसे में मौलवी वल्लीउल्लाह बनारस ब्लास्ट से कुछ साल पहले भी पुलिस के हत्थे चढ़ा था। उसकी लकड़ी की टाल से पुलिस ने छापेमारी कर एके-47, आरडीएक्स सहित अन्य आपत्तिजनक वस्तुएं पकड़ी थीं। बाद में वह जमानत पर छूट गया था।

ब्लास्ट के बाद से ही संकटमोचन मंदिर में होने वाली शादियों पर लगी थी रोक
संकटमोचन ब्लास्ट के बाद से ही मंदिर में अब शादियां नहीं होती हैं। सात मार्च 2006 को मंगलवार का दिन था। उस समय संकटमोचन मंदिर में शादियां हो रही थी। यही नहीं वहां पर यज्ञ व हवन पूजन चल रहा था।  बम ब्लास्ट के बाद से मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा कारणों से यहां होने वाली शादियों पर रोक लगा दी है। जिस समय धमाका हुआ था उस समय फोटोग्राफर हरीश बिजलानी शादी की फोटो खींच रहे थे। ब्लास्ट में उनकी मौत हो गई थी। ब्लास्ट के पहले तक यहां शादी विवाह से जुड़े कई आयोजन होते थे।

आर्थिक रूप से कमजोर लोग इसी मंदिर में भगवान को साक्षी मानकर शादियां करते थे। जब से इस मंदिर में शादियों पर रोक लगी है, तब से लोग आस पास के दूसरे मंदिरों में जाकर शादी समारोह करते हैं। मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने बताया कि बम विस्फोट के बाद सुरक्षा कारणों को देखते हुए यहां शादियों पर प्रतिबंध लगा है।

...तो चली जाती हजारों की जान

दशाश्वमेध घाट पर हुआ था धमाका - फोटो : अमर उजाला
काशी को दहलाने की साजिश रचने वाले आतंकियों ने फूल प्रूफ प्लानिंग की थी। उस समय के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जिस तरीके से आतंकियों ने काशी में सीरियल बम ब्लास्ट की योजना बनाई थी, उसमें उतना कामयाब नहीं हो पाए थे। यदि दशाश्वमेध का कुकर बम फटा होता जनहानि हजारों में पहुंच जाती।

उन्होंने बताया कि लश्कर ए तैयबा से जुड़े आतंकियों के माड्यूल ने ब्लास्ट से पहले यहां रेकी की थी। इसके बाद उन्होंने बिहार से बम बनाने का सामान खरीदा था। जिसे नेपाल के जरिये यहां प्लांट किया गया था। समय और स्थान इस तरीके से तय किया गया था बड़ी जनहानि हो सके। उन्होंने समय पौने छह बजे से लेकर साढ़े सात बजे के अंदर का चुना था।
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यही कारण था कि पहला ब्लास्ट संकटमोचन मंदिर में शाम साढ़े पांच बजे के बाद हुआ था। जिस समय मंदिर में शादी करने और दर्शन पूजन करने वालों की भीड़ होती है। इसके बाद दूसरा ब्लास्ट कैंट स्टेशन पर किया गया था। उस समय शिवगंगा ट्रेन आने वाली थी। उस समय भी यहां काफी भीड़ होती है। इसके बाद तीसरा ब्लास्ट करने के लिए दशाश्वमेध मार्ग पर कुकर बम रखा गया था। उस समय आरती के बाद हजारों श्रद्धालुओं का रेला सड़क पर होता है। ऐसी स्थिति में यह कुकर बम फटता तो जनहानि बहुत अधिक होती।
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