जब से बारिश शुरू हुई है तब से बनारस शहर में कहीं न कहीं से सड़क धंसने की खबर आ ही जाती है। अभी तो बारिश की शुरुआत है, अगर और बारिश हुई तो कई इलाकों की सड़कें खराब हो जाएंगी। सड़कों के धंसने के चलते जलभराव और गंदगी का अंबार लग गया है।
शहर में लटकते तारों को देखते हुए आईपीडीएस योजना के तहत केबल को भूमिगत करने की योजना बनाई गई थी। योजना तहत काम शुरू तो हुआ लेकिन लापरवाही के साथ, जिसका खमियाजा बारिश में भुगतना पड़ रहा है।
पुरानी काशी में आईपीडीएस योजना में भूमिगत की गई केबल शहर की सड़कों के लिए मुसीबत बन गई है। तारों को भूमिगत करने में हुई लापरवाही के चलते बारिश में सड़कें जगह-जगह धंस रही हैं। मानक के अनुरूप केबल डालने के लिए खुदाई और बाद में उसका सही भराव नहीं होने की वजह से भूमिगत केबल वाले इलाके की सड़कें लगातार धंस रही हैं।
ऐसे में सड़कों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर में गंगा किनारे से दो किमी चौड़ाई और आठ किमी लंबाई में आईपीडीएस के तहत 572 करोड़ रुपये से भूमिगत केबल डाली गई है। यह कार्य पूरा भी हो गया है, लेकिन इस केबल को डालने में मानकों की अनदेखी की गई है।
ऐसे में जहां बारिश के बाद केबल सड़कों के किनारे दिखने लगी हैं वहीं सड़कें लगातार धंस रही हैं। ऐसे में धीरे-धीरे भूमिगत केबल योजना लोगों के लिए दुर्घटना का कारण बनती जा रही हैं।
अगर इस समस्या का हल नहीं खोजा गया तो आने वाले समय में यह लोगों के लिए नासूर बन सकती है। बारिश के बाद नरिया, नगंवा, रविन्द्रपुरी, अस्सी, लंका, सोनिया, रथयात्रा, सिगरा चौराहा, मैदागिन, मच्छोदरी, चौक, कोनिया सहित कई कई इलाके हैं, जहां सड़कें धंस रही है।