पीएफसी की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक परमिंदर चोपड़ा ने कहा कि संस्था देश में आधारभूत ढांचे के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक कल्याण के लिए भी लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि काशी जैसे ऐतिहासिक शहर में 58 करोड़ रुपये की इस परियोजना के माध्यम से जल निकायों का पुनरुद्धार करना पीएफसी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर आधुनिक मानकों के अनुरूप पूरा किया जाएगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार होगा और स्थानीय पर्यावरण को भी मजबूती मिलेगी।
नगर आयुक्त एवं वाराणसी स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी हिमांशु नागपाल ने बताया कि परियोजना के तहत तालाबों और कुंडों का सौंदर्यीकरण करने के साथ उनके जल को प्राकृतिक तरीके से स्वच्छ बनाए रखने के लिए पर्यावरण अनुकूल तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही सामुदायिक कुओं का भी जीर्णोद्धार किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
परियोजना के अंतर्गत सारनाथ, कंदवा, संदाहा, रेवागीर, सारंगनाथ, पुलिस लाइन और पांडेयपुर सहित 25 तालाबों की डिसिल्टिंग एवं डिसलजिंग, रानीपोखरी, कोनिया बैतरणी कुंड, कुरुक्षेत्र तालाब, सोना तालाब, बाबा जगन्नाथ दास सरोवर और पोंगलपुर सहित 30 कुंडों के पुनरुद्धार तथा 100 सामुदायिक कुओं के जीर्णोद्धार और जल शोधन का कार्य कराया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में एमओयू की प्रतियों का आदान-प्रदान किया गया। अधिकारियों ने इसे काशी की पारंपरिक धरोहरों के संरक्षण और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।