सपा सरकार के पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ दशाश्वमेध थाने में दर्ज रंगदारी मांगने का मुकदमा सोनभद्र जिले के चोपन क्षेत्र की 36 एकड़ जमीन के बालू खनन के टेंडर से जुड़ा है। यह टेंडर जंगमबाड़ी निवासी अरविंद तिवारी को मिला था लेकिन कभी काम ही नहीं शुरू हो पाया।
अरविंद का कहना है कि उन्होंने टेंडर के लिए पर्यावरण विभाग, वन विभाग, खनन विभाग, जिला प्रशासन और लखनऊ के अधिकारियों पर 10 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किया लेकिन एक रुपये का भी खनन नहीं करा पाए।
अरविंद ने बताया कि वर्ष 2014 में उन्हें बालू खनन का टेंडर मिला था। इसके बाद लगभग ढाई साल का समय पर्यावरण विभाग की एनओसी मिलने में लग गया। इस दौरान वन विभाग की एनओसी सहित अन्य प्रशासनिक शर्तों को भी पूरा किया।
2017 में जब काम शुरू कराने की बारी आई तो प्रदेश की नई सरकार ने नई खनन नीति जारी कर दी और उनका टेंडर निरस्त हो गया। कहा कि एनओसी वगैरह के काम के दौरान ही उन्होंने लखनऊ में गायत्री प्रसाद प्रजापति से मुलाकात की थी।
मगर, पर्यावरण विभाग की एनओसी मिलने में पूर्व मंत्री की कोई भूमिका नहीं रही और काम शुरू होने से पहले ही टेंडर निरस्त हो गया। इसके बावजूद पूर्व मंत्री ने नौ जून को कॉल कर कहा कि कमीशन दे जाओ नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतना होगा।
यही नहीं, पूर्व मंत्री के दो करीबियों ने भी उनसे कहा कि लखनऊ जेल चले जाओ और कमीशन दे आओ। अरविंद ने कहा कि धमकी भरी कॉल से वह और उनका परिवार सहमा हुआ है। उधर, पुलिस मुकदमा दर्ज करने के बाद मामले की छानबीन में जुटी है।
सर्विलांस की मदद से पुलिस की तफ्तीश में यह स्पष्ट हो गया है कि अरविंद तिवारी के मोबाइल पर नौ जून को लखनऊ जेल से कॉल आई थी। ऐसे में जल्द ही आरोपी गायत्री प्रसाद प्रजापति से पूछताछ के लिए पुलिस की एक टीम लखनऊ जेल जाएगी।