श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के अहिल्याबाई होल्कर द्वारा कराए जीर्णोद्धार के बाद के 240 साल के नव इतिहास में पहली बार यहां बाबा का कुंभाभिषेक होगा। दो जुलाई से पांच जुलाई तक कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य विजेंद्र सरस्वती की देखरेख में दो सौ दक्षिण भारतीय ब्राह्मण यह अनुष्ठान संपन्न कराएंगे। बाबा के मंदिर के स्वर्णशिखर से लेकर गर्भगृह तक कुंभाभिषेक होगा।
दक्षिण भारत में हर 12 वर्ष पर मंदिरों की सकारात्मक ऊर्जा और पवित्रता को बनाए रखने के लिए यह अनुष्ठान किया जाता है। राज राजेश्वर स्वरूप में विराजित बाबा विश्वनाथ के मंदिर के कुं भाभिषेक का शुभारंभ दो जुलाई को गंगा तट से कलश यात्रा के साथ होगा। \
यह कलश यात्रा मंदिर परिक्षेत्र से होते हुए बाबा के दरबार तक जाएगी। यहां पर गंगा के जल की 13 विधि से पूजा की जाएगी। दो सौ विद्वान ब्राह्मण मंत्रोच्चार एवं पूजन करेंगे। पांच जुलाई तक पूजन की प्रक्रिया निरंतर चलेगी।
इसी दौरान पांच जुलाई की सुबह से गंगा जल से मंदिर के स्वर्ण शिखर से कुंभाभिषेक की प्रक्रिया शुरू होगी। दक्षिण भारत के यजमान सुबू सुंदरम कुंभाभिषेक का खर्च उठा रहे हैं।
मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह ने बताया कि दक्षिण भारत के मंदिरों में हर 12 वर्ष पर कुंभाभिषेक की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास में यहां कुंभाभिषेक पहली बार होने जा रहा है।