बनारस के सिगरा थाना अंतर्गत औरंगाबाद की मीरा जायसवाल की हत्या उसके बेटे अमित ने अपने दो दोस्तों दौलतपुर पांडेयपुर के धीरज उर्फ धीरू शीतलानी और रमरेपुर पहड़िया के शिवम सिंह के साथ मिल कर की थी। तीनों के पास से वारदात में प्रयुक्त चाकू, छह मोबाइल, 47 हजार रुपये, एक स्कूटी, एक मोपेड और दो ग्लब्स बरामद कर पुलिस ने शनिवार को जेल भेज दिया।
पुलिस के अनुसार मीरा के तानाशाह रवैये, प्रताड़ना और झगड़ालु प्रवित्ति से आजिज आकर उसके बेटे अमित ने दोनों दोस्तों के साथ उसकी हत्या की। 20 सितंबर की सुबह कैंट थाना अंतर्गत छोटा लालपुर में पोखरे के किनारे झाड़ियों में पॉलिथीन के थैले में पैक कर एक महिला का शव फेंका पड़ा मिला था। महिला के पास से बरामद गैस पासबुक से उसकी शिनाख्त मीरा जायसवाल (47) के तौर पर हुई।
एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि इंस्पेक्टर कैंट राजीव रंजन उपाध्याय ने तफ्तीश शुरू की तो सामने आया कि मीरा का किसी से कोई विवाद नही था। मंगलवार से घर से गायब मीरा के संबंध में सिगरा थाने पर सूचना भी नहीं दी गई थी।
इंस्पेक्टर कैंट ने मीरा के बेटे अमित से पूछताछ शुरू की तो उसके बार-बार बदलते बयानों के कारण उस पर शक गहराता चला गया। कड़ाई से हुई पूछताछ में अमित टूट गया और स्वीकार किया कि उसी ने दो दोस्तों के साथ अपनी मां मीरा की हत्या की है।
अमित ने पुलिस को बताया कि उसकी मां बेहद झगड़ालु और तानाशाह किस्म की थी। उसकी प्रताड़नाओं से आजिज आकर पिता अनिल सिंह डेढ़ साल पहले घर छोड़ कर भाग गए। नानी, बहन और अन्य रिश्तेदारों ने उसके घर आना-जाना बंद कर दिया था।
अमित ने बताया कि दो माह पहले उसकी शादी गोरखपुर की अंकिता से हुई तो मां कहती थी कि तुम किसी से भी मोबाइल से बात किया करो तो मेरे सामने स्पीकर ऑन कर बात किया करो। मां की हरकतों से परेशान होकर पत्नी अपने मायके चली गई। घर पर हमने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की दुकान खोली तो मां हमसे नौकरों जैसे बरताव करती थी। 50-100 रुपये मांगने के लिए भी दिन-दिन भर रिरियाना पड़ता था।