बाबा विश्वनाथ और महामना का आशीर्वाद
मूल रूप से सिद्धार्थनगर के मदनपुर गांव निवासी प्रो. कमलाकर त्रिपाठी इस पद्म पुरस्कार को बाबा विश्वनाथ और महामना पंडित मदन मोहन मालवीय का आशीर्वाद मानते हैं। स्नातक, परास्नातक स्तर की पढ़ाई गोरखपुर से करने के बाद वे 1970 में काशी आए। यहां उन्होंने आईएमएस बीएचयू से एमबीबीस, एमडी किया। 1978 में ही मेडिसिन डिपार्टमेंट में बतौर लेक्चरर सेवा की शुरूआत की। इसके बाद प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रहने के साथ ही उन्होंने अन्य कई जिम्मेदारियों का भी बखूबी निर्वहन किया। 2016 में बीएचयू से सेवानिवृत्त होने के बाद नियमित मरीजों की सेवा में लगे हैं। उन्हें दोपहर में पद्म पुरस्कार मिलने की सूचना पीएमओ से मिली।
125 साल बाद भी योग को बनाया है मिशन
काशी में 1985 से ही रहने वाले 125 वर्षीय बाबा शिवानंद ने योग को अपने जीवन का मिशन बनाया है। वह आज भी हर दिन न केवल योग करते हैं बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं। मूल रूप से कोलकाता निवासी बाबा शिवानंद इस समय वाराणसी के कबीरनगर दुर्गाकुंड में रह रहे हैं। पिछले साल नौ जून 2021 को शहरी सीएचसी दुर्गाकुं ड पहुंचकर कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लगवाई, जबकि एक नवंबर को दूसरी डोज का टीका भी लगवाने पहुंचे। बाबा शिवानंद के हवाले से उनके शिष्य संजय ने बताया कि बाबा को पद्म सम्मान मिलने की जानकारी दोपहर में एक फोन के माध्यम से मिली। इसके बाद बाबा ने आश्रम में ही पूजन अर्चन की।
पद्मश्री संस्कृत भाषा का सम्मान
राष्ट्रपति सम्मान सहित अन्य कई सम्मानों से पुरस्कृत महामहोपाध्याय आचार्य वशिष्ठ त्रिपाठी को भी पद्मश्री सम्मान मिल रहा है। साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में पद्म सम्मान पाने वाले वशिष्ठ त्रिपाठी का कहना है कि यह संस्कृत भाषा का सम्मान है। महज 20 वर्ष की आयु से ही अध्यापन कार्य करते हुए वर्ष 2001 में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के न्याय वैशैषिक विभाग के अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुए। वह 10 दिन तक विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति भी रहे। वशिष्ठ त्रिपाठी ने बताया कि भारतीय भाषाएं संस्कृत भाषा से ही निर्गत होती हैं। भारतीय सभ्यता संस्कृति का मूल श्रोत है।
काशी की संगीत परंपरा का सम्मान
बनारस घराने के जाने माने सितारविद पंडित शिवनाथ मिश्र को पद्मश्री सम्मान मिलने की सूचना मिलने के बाद उनके घर बधाई देने वालो का तांता लग गया। सितारवादन के क्षेत्र काशी में पंडित रविशंकर के बाद पंडित शिवनाथ मिश्र को यह सम्मान प्राप्त हुआ है जो काशी की शास्त्रीय संगीत परम्परा के लिए बहुत सुखद है। पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद पंडित शिवनाथ मिश्रा ने कहा कि यह सम्मान मेरा व्यक्तिगत सम्मान नही है बल्कि शास्त्रीय संगीत और कलाकारों का सम्मान है। इनके पुत्र पंडित देवब्रत मिश्र भी सितार के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं। पिता पुत्र की यह जोड़ी दुनिया भर में भारत की शास्त्रीय संगीत की परंपरा को स्थापित की हुई है।