पीएम नरेंद्र मोदी ने जहां बिजली व्यवस्था पर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया तो वहीं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए पीएम को गंगा की कसम खाकर बोलने की चुनौती दे डाली। पीएम-सीएम के इस वाक्युद्ध में बिजली विभाग का फ्यूज उड़ गया है।
सीएम ने वाराणसी की विद्युत आपूर्ति को लेकर पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन से जवाब तलब किया है। इस पर चेयरमैन ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लि. के एमडी से जवाब मांगा है। इसके बाद से पूरे विभाग में हड़कंप मचा है। विभाग आपूर्ति से संबंधित दस्तावेज संभालने में जुटा है।
पीएम के संसदीय क्षेत्र में भले ही राज्य सरकार शहरी इलाकों को 24 घंटे बिजली देने का वायदा कर रही है लेकिन हकीकत इससे जुदा है। विकास कार्यों के नाम पर हो रही खुदाई की आड़ में प्रतिदिन औसतन तीन से चार घंटे बिजली कट रही है।
कहीं पांच से आठ घंटे तो कहीं दो से तीन घंटे की कटौती हो रही है। जिसे विभागीय अधिकारी भी स्वीकार करते हैं लेकिन बोलने से कतराते हैं। शहरी इलाकों में 400 से 425 मेगावाट प्रतिदिन बिजली की डिमांड है। पारेषण को 400 मेगावाट बिजली मिल रही है।
25 मेगावाट का जो अंतर आ रहा है, उसे मेंटेन करने के लिए ही बगैर किसी सूचना के कटौती की जा रही है। इस कटौती का कोई रिकार्ड भी नहीं रखा जाता। यही कारण है कि 24 घंटे का शेड्यूल फॉलो ही नहीं हो रहा है।