उन्होंने बताया कि इस समस्या को अपर मुख्य सचिव वित्त की अध्यक्षता में हुई पेंशन सलाहकार समिति की बैठक में भी उठाया गया था। प्रांतीय नेतृत्व ने अधिकारियों को बताया था कि 60 से 90 वर्ष तक के बुजुर्ग पेंशनरों के लिए ऑनलाइन आवेदन करना आसान नहीं है। दूरदराज के गांवों में रहने वाले पेंशनरों को बिल ऑनलाइन कराने में भी दिक्कत होती है। ऐसे में विभागों में उपलब्ध कर्मचारियों और कंप्यूटर की मदद से ऑफलाइन बिल जमा करने की व्यवस्था जारी रखी जानी चाहिए। इससे आवेदन में आने वाली आपत्तियों का भी विभागीय स्तर पर निस्तारण हो सकेगा।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का आरोप है कि बैठक में सरलीकरण का सुझाव देने और आश्वासन मिलने के बावजूद शासन ने ऑनलाइन व्यवस्था अनिवार्य रखी। इससे बीमार पेंशनरों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति से जुड़ी फाइलें जिलों में लंबित पड़ी हैं। समय पर इलाज का खर्च नहीं मिलने से उनकी मुश्किलें बढ़ रही हैं।
धरने के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर शासन की इस व्यवस्था पर नाराजगी जताई गई। पेंशनरों ने मांग की कि ऑनलाइन आवेदन के साथ ऑफलाइन और मैनुअल दावे स्वीकार करने की व्यवस्था भी बहाल की जाए, ताकि बुजुर्गों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए परेशान न होना पड़े।
इनकी रही मौजूदगी
धरने को श्यामधनी, सीताराम, राकेश दीक्षित, उमाकांत पांडेय, निरंजन श्रीवास्तव, इंजीनियर राधेश्याम पटेल, महिमादत्त द्विवेदी, सहदेव तिवारी, अजय सिंह, गोपाल जी यादव, डॉ. रामअवतार यादव, डॉ. श्रीकांत पांडेय, प्रमोद श्रीवास्तव, राजेश पांडेय और अशोक सिंह आदि ने संबोधित किया। धरने की अध्यक्षता वीरेंद्र सिंह ने की और संचालन अशोक सिंह ने किया।