क्या बोले जानकार
जिस कंपनी का कफ सिरप पीकर मध्य प्रदेश में बच्चों की मौत हुई है, उस कंपनी की सप्लाई बनारस में नहीं होती है। इसके बाद भी इससे मिलती-जुलती कंपनी के सभी कफ सिरप की जांच कराई जा रही है। यह अभियान जारी रहेगा। -चंद्रेश द्विवेदी, ड्रग इंस्पेक्टर
कफ सिरप को बनाने में ग्लिसरीन का प्रयोग होता है। यह महंगा होता है। ऐसे में बहुत सी कंपनियां गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखती हैं। सरकार को नए सिरे से गुणवत्ता की जांच करानी चाहिए। बच्चों को कफ सिरप अगर कोई डॉक्टर लिख रहे हैं तो उनको खुद भी कंपनियों के बारे में पूरी जानकारी करनी चाहिए। ऐसा करने से मिलावटी दवाइयों पर रोक लगाई जा सकती है। -डॉ. अशोक राय, पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भारतीय बाल अकादमी
दवा मंडी में उस कंपनी का कोई कफ सिरप नहीं है, जिसमें मध्य प्रदेश में मिलावट की पुष्टि हुई है। वर्तमान समय में जिन भी विक्रेताओं के पास जिस भी कंपनी के कफ सिरप के स्टॉक हैं, उसको नए सिरे से जांच करने को कहा गया है। अगर कहीं भी किसी तरह की कोई गड़बड़ी की जानकारी मिलती है तो तुरंत समिति के पदाधिकारियों को सूचना देने को कहा गया है। -संजय सिंह, महामंत्री, दवा विक्रेता समिति