विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला में हाथी के इस्तेमाल के लिए वन विभाग से अनुमति नहीं ली गई थी। प्रशासन के अनुसार, रामलीला में हाथी के उपयोग के लिए अनुमति लेने की परंपरा नहीं रही है। उधर, रविवार को बिदके धनराज हाथी को आधी रात के बाद तीन इंजेक्शन देकर काबू किया गया। इसके बाद से उसे प्रभु नारायण राजकीय इंटर कॉलेज के सामने स्थित रासलीला मैदान में बांधकर रखा गया है। वन विभाग और हाथी मालिक के कर्मचारी उसकी निगरानी कर रहे हैं।
अनुमति लेने की नहीं रही है परंपरा
दुर्ग प्रशासन के सुरक्षा अधिकारी राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि रामनगर की रामलीला में हाथी के इस्तेमाल के लिए वन विभाग से अनुमति लेने की परंपरा नहीं रही है। इसी वजह से इस वर्ष भी अनुमति नहीं ली गई थी। रामलीला में काशीराज परिवार के डॉ. अनंत नारायण सिंह और उनके पूर्वजों के हाथी पर सवार होकर लीला में शामिल होने की परंपरा वर्षों पुरानी है।