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वाराणसी: न हथकड़ी लगी, न जेल गए, 2 साल में 11 दोषियों को अदालत में खड़े रहने की सजा; 200 से 700 का जुर्माना

Sat, 29 Aug 2026 08:57 AM IST
Aman Vishwakarma रवि प्रकाश सिंह, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में पिछले दो वर्षों में 11 दोषियों को अदालत ने जेल भेजने या हथकड़ी लगाने के बजाय अदालत में खड़े रहने की सजा सुनाई। इन पर 200 से 700 रुपये तक जुर्माना भी लगाया गया। दोषियों को कार्यवाही पूरी होने तक अदालत में खड़े रहकर सजा भुगतनी पड़ी। यह फैसला छोटे अपराधों में सुनाया गया।

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वाराणसी कोर्ट। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अदालत में फैसला सुनते ही किसी को जेल जाने की चिंता सताती है तो कोई जमानत की जुगत में लग जाता है। लेकिन, वाराणसी में पिछले दो साल में 11 दोषियों के लिए सजा का अंदाज कुछ अलग रहा। न उन्हें हथकड़ी लगी, न ही उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजा गया। 

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अदालत ने उन्हें न्यायालय उठने तक की सजा सुनाई। दोषी अदालत में तब तक खड़े रहे, जब तक न्यायिक कार्यवाही चलती रही। न्यायालय की कार्यवाही खत्म होते ही उनकी सजा पूरी हो गई। इस सजा के साथ उन पर महज 200 से 700 रुपये तक का अर्थदंड लगाया गया।

छोटे-मोटे अपराध और मामूली विवाद के मामलों में पहली बार दोषी पाए जाने पर अदालतों के फैसले में इस सजा के साथ सुधार का पहलू भी नजर आया। इन मामलों में जुआ खेलने, चोरी का प्रयास, राह चलते मारपीट, धमकी देने और अभद्र टिप्पणी करने जैसे अपराध शामिल रहे। 
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इन मामलों में अपराध के लिए दोषियों को जेल भेजने के बजाय अदालत ने कम अवधि की सजा और अर्थदंड का प्रावधान किया। सुनवाई के दौरान जब दोषियों से उनके कृत्य के बारे में पूछा गया तो कई ने अपनी गलती स्वीकार की और भविष्य में ऐसी हरकत दोबारा न करने का भरोसा दिलाया। विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, जिनके खिलाफ मामूली धाराओं में मामले दर्ज होते हैं या फिर छोटे अपराध में दोषी पाए जाते हैं, उनके लिए ऐसी सजा का प्रावधान सुधारात्मक पहल के तौर पर किया जाता है। संवाद

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ये है न्यायालय उठने तक की सजा
न्यायालय उठने तक की सजा का आशय है कि दोषी को न्यायालय द्वारा निर्धारित अवधि तक अदालत में मौजूद रहना होता है। न्यायालय की कार्यवाही समाप्त होने और अदालत के उठने के साथ उसकी सजा पूरी मानी जाती है। हालांकि, इस सजा से दोषसिद्धि समाप्त नहीं होती। इस तरह के फैसले में दंड के साथ दोषी को अपनी गलती का अहसास कराने और भविष्य में अपराध से दूर रहने का संदेश भी दिया जाता है।

जुआ खेलने के मामले में 200 रुपये जुर्माना
साल 2023 में पुलिस ने जुआ खेलने के आरोप में शिवपुर निवासी भैयालाल को गिरफ्तार किया था। करीब दो साल चले मुकदमे के बाद अदालत ने हाल ही में उसे दोषी करार देते हुए न्यायालय उठने तक की सजा सुनाई। दोषी न्यायालय की कार्यवाही पूरी होने तक अदालत में मौजूद रहा। उसने अदालत से भविष्य में दोबारा गलती न करने का भरोसा दिलाया। अदालत ने उस पर 200 रुपये का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर तीन दिन की अतिरिक्त सजा भुगतने का आदेश दिया गया।

आर्म्स एक्ट के पुराने मामले में 700 रुपये अर्थदंड
चेतगंज थाने में वर्ष 2000 में आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज मामले में आरोपी वीरेंद्र कुमार को अदालत ने दोषी करार दिया। उसे न्यायालय उठने तक की सजा सुनाई गई। साथ ही 700 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर उसे 10 दिन की जेल की सजा भुगतनी होगी।
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चोरी के प्रयास में 500 रुपये अर्थदंड
सिगरा थाने में वर्ष 2025 में चोरी के प्रयास और धमकी देने के मामले में आरोपी मनीष को अदालत ने दोषी करार दिया। उसे न्यायालय उठने तक की सजा सुनाई गई। साथ ही 500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड जमा नहीं करने पर 10 दिन जेल में रहने का आदेश दिया गया।
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