गणपत मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। वह दो भाइयों में एक था। परिवार में पत्नी रेखा प्रजापति, पुत्र सत्यम और पांच वर्षीय पुत्री शिवांगी हैं। हादसे की सूचना मिलते ही परिवार में मातम छा गया। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन से चार महीनों में कुटी घाट पर डूबने से सात से आठ लोगों की मौत हो चुकी है। प्रतिदिन यहां सैकड़ों श्रद्धालु स्नान और दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। ग्रामीणों ने बताया कि घाट पर एक सीमा तक पानी कम गहरा रहता है, लेकिन उसके आगे अचानक 25 से 30 फीट गहराई हो जाती है, जिससे लोग हादसे का शिकार हो जाते हैं। लोगों ने घाट पर चेतावनी बोर्ड, स्थायी गोताखोर और सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।