करीब दो किलोमीटर लंबा मार्ग तय करने में जुलूस को लगभग पांच घंटे लगे। यह जुलूस दालमंडी से निकलकर कालीमहाल, पितरकुंडा और लल्लापुरा होते हुए दरगाहे फातमान पहुंचा। रास्ते भर उलेमा मर्सिया और कलाम पढ़ते रहे, जबकि सरफराज ने हुसैनियत का पैगाम दिया।
दरगाहे फातमान में समर जाफरी, सलमान हैदर, हैदर कैरतपुर और अफादारे हुसैनी सहित अन्य अकीदतमंदों ने बारगाह में सलाम पेश किया। पूरे आयोजन के दौरान गम और अकीदत का माहौल बना रहा।
अंत में आयोजित मजलिस को मौलाना वसी असगर पाशा ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कर्बला केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि इमाम हुसैन का अपने रब से किया गया वह वादा और संदेश है, जो इंसानियत, सब्र, कुर्बानी और सत्य के लिए डटे रहने की प्रेरणा देता है। उनकी तकरीर को उपस्थित लोगों ने गंभीरता से सुना।