साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर चुनाव आयोग के कोई भी मतदाता न छूटे के आदर्श वाक्य का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि विधि आयोग की 255वीं रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनाव के लिए एक ही मतदाता सूची का उपयोग करने से प्रक्रिया सुव्यवस्थित होगी और सार्वजनिक संसाधनों की बचत होगी।
विचार गोष्ठी के समापन सत्र पर सभापति, विधान परिषद ने विचार गोष्ठी में प्रतिभाग करने वाले सदस्यों, विद्वान वक्ताओं, आयोजकों, मीडिया, अधिकारियों और कर्मचारियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि सभी के सहयोग, कठिन परिश्रम और लगन से ही इस गोष्ठी को सफल और भव्य बनाया गया।
विधान परिषद के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश सिंह ने एसआईआर की वैधानिकता, उसके न्यायिक पक्ष और नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने बताया कि एसआईआर प्रक्रिया की आवश्यकता इसलिए है कि बाहरी घुसपैठियों की पहचान की जा सके और जिससे चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाया जा सके।