दवा विक्रेता समिति वाराणसी के महामंत्री संजय सिंह ने बताया कि ऑनलाइन दवा कारोबार न सिर्फ छोटे और मध्यम दवा व्यापारियों के लिए नुकसानदायक है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से भी ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन दवाओं की खरीद में गलत दवा मिलने, एक्सपायरी या शिकायत होने पर उपभोक्ताओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी के विरोध में राष्ट्रीय स्तर पर बंदी का निर्णय लिया गया।
उन्होंने बताया कि वाराणसी जिले में करीब पांच हजार दवा दुकानें हैं। सप्तसागर दवा मंडी से पूर्वांचल के लगभग 10 जिलों के दवा कारोबारी प्रतिदिन दवाएं खरीदने आते हैं। बंदी के समर्थन में समिति के पदाधिकारियों ने पहले ही अभियान चलाकर दुकानदारों को जागरूक किया था। चिकित्सा सेवा से जुड़े कई संगठनों ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है।
समिति के अनुसार, बंदी की सूचना ड्रग विभाग समेत संबंधित अधिकारियों को पहले ही दे दी गई थी। दवा व्यापारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगे भी आंदोलन जारी रहेगा।