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Varanasi News: असि नदी को टैप करने को लेकर NGT ने NMCG से मांगा स्पष्टीकरण, रिपोर्ट तलब; जानें खास

Tue, 10 Feb 2026 05:41 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी में अब तक सीवर की व्यवस्था पूरी तरह न हो पाने को लेकर प्रदेश सरकार और एनएमसीजी से छह सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। इस मामले में बीते 5 फरवरी को सुनवाई हुई थी। पीठ ने यह भी चिंता जताई कि कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट संभवतः गंगा के बाढ़ क्षेत्र में स्थित हैं।
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वाराणसी में असि नदी की दुर्दशा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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NGT: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने गंगा नदी एवं उसकी सहायक नदियों में अनुपचारित मलजल और औद्योगिक अपशिष्ट के लगातार प्रवाह पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। असि नदी को टैप किए जाने को लेकर जहां एक ओर राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) से स्पष्टीकरण तलब किया है, वहीं वाराणसी में 100 फीसदी सीवर व्यवस्था न हो पाने को लेकर प्रदेश सरकार और एनएमसीजी से छह सप्ताह में रिपोर्ट तलब की है।

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एनजीटी ने स्टॉर्म वाटर, नालों और गंगा की सहायक नदी असि की अवैध टैपिंग को पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। इस मामले में बीते 5 फरवरी को सुनवाई हुई थी। सोमवार को आदेश जारी किया गया। न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और डॉ. ए. सेंथिल वेल की पीठ ने मामले की सुनवाई की। 

अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत उत्तर प्रदेश सरकार की राज्य कार्य योजना के अनुसार, वाराणसी और चंदौली जिलों में कुल 76 नाले गंगा एवं वरुणा नदियों में गिरते हैं। इनमें से 31 नाले आंशिक रूप से या बिल्कुल भी टैप नहीं किए गए हैं। इससे अनुपचारित मलजल नदी में जा रहा है।

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एनजीटी ने स्पष्ट किया कि स्टॉर्म वाटर और नालों को स्थायी रूप से टैप करना अनुमन्य नहीं है, क्योंकि इससे नदी की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचता है। ऐसी टैपिंग केवल अस्थायी व्यवस्था के रूप में ही की जा सकती है, वह भी स्पष्ट समय-सीमा के साथ। एनजीटी ने यह भी पाया कि असि नदी, जो गंगा की सहायक नदी है, को नाला मानकर टैप किया गया है, जो कि गंगा नदी (पुनर्जीवन, संरक्षण एवं प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 का स्पष्ट उल्लंघन है। इस संबंध में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।

पीठ ने यह भी चिंता जताई कि कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट संभवतः गंगा के बाढ़ क्षेत्र में स्थित हैं। एनएमसीजी को निर्देश जारी कर कहा गया है कि वह यह स्पष्ट करे कि डीपीआर स्वीकृत करते समय बाढ़ क्षेत्र से संबंधित नियमों का पालन किस प्रकार किया गया। 

यह भी उल्लेख किया गया कि वाराणसी में 4.14 लाख घरों में से अब तक केवल 1.56 लाख घरों को ही सीवर नेटवर्क से जोड़ा गया है और राज्य सरकार को 100 फीसदी सीवर कनेक्टिविटी की समय-सीमा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार एवं एनएमसीजी को छह सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का समय दिया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी।
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