मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी ने कहा कि हमने मजहब बदला है, धर्म नहीं। धर्म तो सिर्फ सनातन है। हम सभी सनातनी हिन्दू हैं। अपने पूर्वजों और परम्पराओं से सभी भारतीय एक हैं। बस पूजा करने का तरीका बदल लिया, इसकी वजह से अपने पूर्वजों और परम्पराओं को छोड़ दें, यह कैसे हो सकता है।
राम के आने का मतलब सुख, समृद्धि, शांति, दया, प्रेम, करुणा, संबंध, संस्कार, एकता, त्याग और सम्मान है। केवल राम नाम से यह सम्भव है तो हर देश को राम नाम की पूंजी अपने परिवार और देश को बचाने के लिए एकत्र करना चाहिए। अफगानिस्तान से हमारे रिश्ते पूर्वजों और खून का है। अफगानिस्तान में भगवान राम की प्रतिमा लगाई जाए ताकि वहां के लोग अपने पूर्वजों की संस्कृति से जुड़ सके।
विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि रामपंथ ही दुनियां में फैली नफरत को खत्म करने का एकमात्र साधन है। जहाँ राम के कदम पड़ेंगे वहां रामराज्य का सुखद अनुभव होगा। राम के आने का मतलब पीड़ा से मुक्ति, प्रेम की वृद्धि और सेवा का संस्कार है। यही तो देश को महान बनाएगा। अब तो दुनियां बस शांति की तलाश कर रही है, तो आये राम की ओर। यहां सभी की स्वीकार्यता है।
विशाल भारत संस्थान की केन्द्रीय परिषद सदस्य डॉ. नजमा परवीन ने कहा कि हम इतने बेगैरत नहीं की अपने पूर्वजों को भूलकर अरबी और तुर्की बनने का नाटक करें। हम शुद्ध भारतीय हैं और हमारी जड़े सनातन में ही है। जाति और गोत्र हमारी पहचान है। हमें कोई फतवा और धमकी हमारे राम से अलग नहीं कर सकता।