बिछड़ चुके हैं कब के खुद हमीं से हम...
लिट फेस्ट में कविता पाठ, गजल, मोनो एक्ट और योग का आयोजन हुआ। हुनर के सरताज मंच पर आयोजित कार्यक्रम में काशी विद्यापीठ के छात्र जयंत मौर्य ने योग प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया, जबकि ईशा सिंह ने शेक्सपियर के नाटक से क्लियोपैट्रा का मोनोएक्ट प्रस्तुत कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
अगली प्रस्तुति में गजल पाठ के दौरान मंडल मिश्र, अमन भदौरिया और रोशनी गुप्ता ने अपनी शायरी से जादू बिखेरा। अमन भदौरिया की गजल बिछड़ चुके हैं कब के खुद हमीं से हम, बचे हुए हैं बस ये शायरी से हम... ने सभी को भावविभोर कर दिया।
राजन शुक्ला की कविता पर दर्शक झूम उठे, जबकि मयंक बनारसी ने काशी पर अपनी कविता से सबका दिल जीत लिया। लखनऊ से आए अनुराग त्रिपाठी ने अपनी किताब के तीन दृश्यों का पाठ किया और शब्द फाउंडेशन के माध्यम से साहित्य के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान की सराहना की गई।