इस अनूठे सांस्कृतिक मिलन के कारण, देवब्रत मिश्र को पूरे यूरोप में कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिससे भारतीय शास्त्रीय संगीत को एक नई वैश्विक पहचान मिलने की संभावना है। उनके आगामी कार्यक्रम यूरोप के स्विट्जरलैंड के अलावा जर्मनी और अन्य देशों में भी प्रस्तावित है।
दुनियभार में पश्चिमी ओपेरा संगीत को स्थापित करने वाले महान जर्मन संगीतकार विल्हेल्म रिचर्ड वागनर के संगीत को सितार पर सजाकर पंडित देवब्रत मिश्र ने इतिहास रच दिया है।
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18वीं सदी के प्रख्यात जर्मन संगीतकार रिचर्ड वागनर, जिनके ओपेरा संगीत को यूरोप सहित पूरे विश्व में सराहा जाता है। वे न केवल पश्चिमी शास्त्रीय संगीत के महान स्तंभ रहे हैं, बल्कि बौद्ध साहित्य के भी गहरे प्रशंसक। वागनर की रचनाओं में कहीं-कहीं बौद्ध कथाओं और दर्शन का प्रभाव भी दिखलाई पड़ता है।
इसी गूढ़ सांस्कृतिक संगम को जीवंत किया भारत के प्रसिद्ध सितार वादक पंडित देवब्रत मिश्र और स्विट्जरलैंड के संगीतकार क्लाउडियो डेनिसर ने। इन्होंने वागनर के संगीत को भारतीय शास्त्रीय संगीत विशेषकर सितार वादन के साथ एक अनूठे और अभिनव ढंग से प्रस्तुत किया। यह पहली बार था जब किसी भारतीय संगीतकार ने वागनर के संगीत के साथ ऐसा प्रयोग किया हो।
इसके साथ ही देवब्रत मिश्र पहले भारतीय संगीतकार बने जिन्हें स्विट्जरलैंड के लुसेर्न स्थित रिचर्ड वागनर म्यूजियम में कार्यक्रम प्रस्तुत करने का अवसर मिला। उनकी और क्लाउडियो डेनिसर की युगल प्रस्तुति को श्रोताओं द्वारा अत्यंत सराहना मिली।