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पीठाधीश्वरों को मिले प्रोफेसर के बराबर वेतन, मिले गुरुकुल का दर्जा

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पातालपुरी मठ में श्री हनुमान चालीसा हवनात्मक यज्ञ के बहाने जुटे काशी के विद्वानों, धर्माचार्यों, पीठाधीश्वरों ने वैदिक शिक्षा और मठों के संरक्षण पर मंत्रणा की। इंद्रेश कुमार ने पातालपुरी मठ में 108 बार हनुमान चालीसा का हवनात्मक यज्ञ किया। काशी के धर्माचार्यों ने पहली बार कहा कि वैदिक अध्ययन कराने वाले मठों को चिन्हित कर उनको सरकारी संरक्षण दिया जाए। मठों को वैदिक शिक्षा के मामले में गुरुकुल का दर्जा देते हुए पीठाधीश्वरों को प्रोफेसर के बराबर वेतन दिया जाए।
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काशी के प्रत्येक मठ में सैकड़ों वेदपाठी ब्राह्मण रहते हैं जिनका खर्च मठ ही उठाते हैं। वैदिक शिक्षा को हाशिये पर डाल देने और सरकारी संरक्षण न मिलने की वजह से वैदिक शिक्षा में गिरावट आई है। अब काशी के धर्माचार्य इस्लामिक स्टडीज की तरह आईएएस में भी वैदिक स्टडीज को विषय बनाना चाहते हैं। इंद्रेश कुमार ने कहा कि जाति, धर्म, रंग, लिंग के भेद को खत्म करने में मठों की बड़ी भूमिका हो सकती है।
पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर महंत बालक दास जी महाराज ने कहा कि रामानंदी संप्रदाय के मठ सभी को गले से लगा कर दीक्षित करेंगे। वेद का अध्ययन सबके लिये खुला है। डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि अब एमए इन रामायण, गीता, महाभारत, रामचरित मानस जैसे पाठ्यक्रम शुरू करने चाहिए। इस दौरान महंत श्रवण दास, महंत ईश्वर दास, महंत रामलोचन दास, महंत अवध बिहारी, महंत राघव दास, महंत अवध किशोर दास, महंत सियाराम दास, महंत सर्वेश्वरशरण दास आदि लोग मौजूद रहे।
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