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Varanasi News: भागवत कथा में सौभरि ऋषि और कल्पग्राम के दिव्य रहस्य का वर्णन, लगे जयकारे; झूम उठे भक्त

Sun, 16 Nov 2025 11:51 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: काशी आनंदम स्पिरिचुअल एंड वेलनेस वैदिक विलेज में कथा के दाैरान सांस्कृतिक आयोजन भी हुए। इसमें भक्तों को कई जानकारियां भी दी गई। भक्ति गीतों पर लोग थिरकते नजर आए।
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कथा के दाैरान की गई भव्य आरती। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर मार्ग के समीप स्थित काशी आनंदम स्पिरिचुअल एंड वेलनेस वैदिक विलेज में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस की कथा अत्यंत भावपूर्ण और ज्ञानवर्धक रही। यह दिव्य कथा कोलकाता के उद्योगपति ज्योति विजय खेमका एवं जया खेमका द्वारा अपने पूर्वजों की पावन स्मृति में आयोजित की जा रही है। कथा का वाचन इस्कॉन कोलकाता के विख्यात कथा-वाचक एचजी सार्वभौम प्रभु कर रहे हैं। 

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कथा वाचक सार्वभौम प्रभुजी ने आज के प्रवचनों में सौभरि ऋषि की यमुना में की गई गहन तपस्या का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि तपस्या के दौरान यमुना में मत्स्य संसर्ग करते देख सौभरि ऋषि के मन में वासना का संचार हुआ, जिससे उनका संकल्प विचलित हो गया और बाद में उन्होंने गृहस्थ जीवन अपनाकर संतानोत्पत्ति की।
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व्यास पीठ से सार्वभौम प्रभु जी ने बाहुक राजा के वंश का वर्णन करते हुए बताया कि बाहुक के पुत्र सगर पराक्रमी और यशस्वी राजा बने। सगर के 60 हजार पुत्र हुए थे, जिन्होंने उनके अश्वमेध यज्ञ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सगर के पुत्र भगीरथ हुए, जिन्होंने पितृ के मोक्ष हेतु कठोर तपस्या की और गंगा मैया का पृथ्वी पर अवतरण कराया। ये प्रसंग भक्तों में अत्यधिक भाव जगाने वाला रहा।

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प्रभु के लगे जयकारे

कथा में सार्वभौम प्रभु जी ने कल्पग्राम के दिव्य रहस्य का भी उल्लेख करते हुए बताया कि इस पावन स्थल पर आज भी भगवान महादेव समाधि में विराजमान हैं और कलियुग के अंत में वे प्रकट होंगे। यह स्थान इतना दिव्य है कि वहां केवल शिवजी का ही प्रवेश सम्भव है। इसी संदर्भ में उन्होंने इलावत जम्बू–द्वीप का वर्णन करते हुए बताया कि वहां भी आज भी भगवान शंकर निवास करते हैं, वहाँ कोई अन्य प्राणी नहीं जा सकता।

इसके साथ उन्होंने मनु वंश, सूर्यवंश और चंद्रवंश की विस्तृत वंशावली भी श्रद्धापूर्वक सुनाई, जिसे भक्तों ने पूरी तन्मयता से सुना। पंचम दिवस की कथा में मिर्जापुर के उद्योगपति महेश चंद्र सिंघानिया सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के मध्य प्रस्तुत लघु नृत्य नाटिका ने वातावरण को और भी भक्तिमय एवं रोचक बना दिया।
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