कथा में सार्वभौम प्रभु जी ने कल्पग्राम के दिव्य रहस्य का भी उल्लेख करते हुए बताया कि इस पावन स्थल पर आज भी भगवान महादेव समाधि में विराजमान हैं और कलियुग के अंत में वे प्रकट होंगे। यह स्थान इतना दिव्य है कि वहां केवल शिवजी का ही प्रवेश सम्भव है। इसी संदर्भ में उन्होंने इलावत जम्बू–द्वीप का वर्णन करते हुए बताया कि वहां भी आज भी भगवान शंकर निवास करते हैं, वहाँ कोई अन्य प्राणी नहीं जा सकता।
इसके साथ उन्होंने मनु वंश, सूर्यवंश और चंद्रवंश की विस्तृत वंशावली भी श्रद्धापूर्वक सुनाई, जिसे भक्तों ने पूरी तन्मयता से सुना। पंचम दिवस की कथा में मिर्जापुर के उद्योगपति महेश चंद्र सिंघानिया सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के मध्य प्रस्तुत लघु नृत्य नाटिका ने वातावरण को और भी भक्तिमय एवं रोचक बना दिया।